पहाड़ों की तलहटी में बसे एक छोटे से गाँव में मीरा नाम की एक महिला रहती थी। उसका पति अर्जुन, उसके लिए किसी अनमोल खजाने से कम नहीं था। एक बार, काम के सिलसिले में अर्जुन को कुछ दिनों के लिए दूर जाना पड़ा।
जैसे ही सूरज ढला और रात का अंधेरा छा गया, मीरा अपनी खिड़की के पास बैठ गई। आसमान में चाँद चमक रहा था, लेकिन मीरा का मन अशांत था। घर का सन्नाटा उसे अर्जुन की याद दिला रहा था। उसने अपना ध्यान दूसरी चीज़ों में लगाने की कोशिश की, लेकिन उसका मन बार-बार अर्जुन के ख्यालों में खो जाता।
उसे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे वह यादों के एक ऐसे भंवर में फंस गई है जहाँ से निकलना मुश्किल है। वह अर्जुन के बिना खुद को अधूरा महसूस कर रही थी। उसकी पूरी चेतना और उसकी आत्मा बस अर्जुन के ही विचारों में डूबी हुई थी। वह बस इसी उम्मीद में बैठी रही कि उसका प्रियतम जल्द ही वापस आएगा।