एक छोटे से गाँव में समीर और मीरा रहते थे। दोनों एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे, लेकिन एक दिन छोटी सी बात पर दोनों के बीच बहस हो गई। मीरा को बहुत गुस्सा आया। उसने सोचा, 'मैं उसे दिखाऊँगी कि मुझे उससे कोई लगाव नहीं है, मैं उससे नफरत करती हूँ।' गुस्से में आकर मीरा घर से बाहर निकल गई।
वह पास के एक बगीचे में जाकर बैठ गई। उसने खुद से कहा, 'अब मैं समीर से कभी बात नहीं करूँगी।' लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, मीरा को समीर की याद आने लगी। उसे समीर का मुस्कुराता हुआ चेहरा और उसकी मीठी बातें याद आने लगीं। मीरा ने महसूस किया कि वह चाहे जितना भी गुस्सा होने का नाटक करे, उसका दिल तो समीर के पास ही जाना चाहता है।
उसका सारा गुस्सा पल भर में गायब हो गया। वह दौड़ती हुई घर वापस आई। समीर दरवाजे पर उदास खड़ा था। मीरा ने उसे देखते ही अपना सारा गुस्सा भुला दिया और दौड़कर उसे गले लगा लिया। वह नफरत दिखाने गई थी, लेकिन प्यार ने उसे जीत लिया।