एक शांत गाँव में मीरा और अर्जुन नाम के पति-पत्नी रहते थे। अर्जुन एक व्यापारी था और उसे काम के सिलसिले में अक्सर लंबी यात्राओं पर जाना पड़ता था। एक बार, अर्जुन को एक बड़े व्यापारिक काम से कई महीनों के लिए बाहर जाना पड़ा।
अर्जुन के जाने के बाद मीरा बहुत अकेली हो गई। दिनों का हिसाब रखने और अपने अकेलेपन को सहने के लिए, मीरा ने एक तरीका निकाला। वह हर दिन दीवार पर एक छोटी सी लकीर खींचती ताकि उसे पता रहे कि अर्जुन को गए हुए कितने दिन बीत गए हैं।
महीने बीतते गए और साल भी। रास्ते की ओर टकटकी लगाकर देखते-देखते मीरा की आँखों की चमक कम होने लगी और रोशनी धुंधली पड़ने लगी। दीवार पर रोज़-रोज़ लकीरें खींचने के कारण उसकी उंगली भी घिसकर पतली हो गई। वह दिन-रात बस अर्जुन के लौटने का इंतज़ार करती रही।
जब अर्जुन वापस आया, तो उसने मीरा की हालत देखी। उसकी घिसी हुई उंगली और धुंधली आँखों ने उसे वह सब बता दिया जो शब्द नहीं कह सकते थे। उसने महसूस किया कि मीरा का इंतज़ार केवल समय काटना नहीं था, बल्कि उसके प्रेम की एक कठिन परीक्षा थी।