एक सुंदर पहाड़ी गाँव में माया नाम की एक महिला रहती थी। उसका पति अर्जुन बहुत ही साहसी और वीर था। एक बार, शांति बनाए रखने और अपनी वीरता दिखाने के लिए अर्जुन को युद्ध के मैदान में जाना पड़ा। जाने से पहले अर्जुन ने माया का हाथ थामकर कहा, "तुम्हारा प्रेम ही मेरी वीरता का संबल है। मैं विजय के साथ वापस आऊंगा।"
अर्जुन के जाने के बाद, माया के दिन बहुत धीरे बीतने लगे। वह अक्सर खिड़की के पास बैठकर रास्ते को निहारती रहती। गाँव के लोग उसे ढाँढस बँधाते, "चिंता मत करो माया, वह एक वीर है, वह ज़रूर लौटेगा।" माया दुखी नहीं थी, बल्कि उसे इस बात का गर्व था कि उसका पति एक नेक काम के लिए गया है। उसके मन में बस एक ही आस थी—अर्जुन की वापसी की।
कुछ हफ़्तों बाद, एक सुनहरी शाम को, उसने दूर से एक साया आते देखा। वह अर्जुन था! वह एक विजेता के रूप में सम्मान के साथ लौटा था। माया की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। उसकी प्रतीक्षा व्यर्थ नहीं गई; अर्जुन के साहस और माया के प्रेम ने उस मिलन को दुनिया का सबसे सुंदर पल बना दिया।