एक छोटे से गाँव में मीरा और उसका पति आकाश रहते थे। आकाश अक्सर काम के सिलसिले में दूर रहता था। जब आकाश घर पर नहीं होता था, तो मीरा को बहुत अकेलापन महसूस होता था। वह हर दिन बस इसी इंतज़ार में रहती कि कब आकाश वापस आएगा।
एक शाम, जब आकाश घर लौटा, तो मीरा को उसे देखकर गुस्सा आ गया। 'तुम इतनी देर से क्यों आए? क्या तुम्हें एक संदेश भेजने का भी समय नहीं मिला?' मीरा ने कड़क आवाज़ में कहा। वह चाहती थी कि आकाश उसकी तन्हाई का अहसास करे।
लेकिन जैसे ही मीरा ने आकाश की आँखों में अपने लिए प्यार देखा, उसका मन भर आया। वह एक अजीब सी कशमकश में थी। उसका मन कह रहा था, 'क्या मुझे इस पर गुस्सा करना चाहिए या दौड़कर इसे गले लगा लेना चाहिए?' उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह नाराज़गी जताए या अपना प्यार।
मीरा उसे डांट तो रही थी, लेकिन उसके हाथ आकाश के हाथों को मजबूती से थामे हुए थे। उसका गुस्सा और उसका प्रेम, दोनों एक साथ उमड़ पड़े। अंत में, उसने अपनी नाराजगी भुलाकर उसे गले लगा लिया।