एक छोटे से गाँव में अर्जुन और मीरा नाम का एक जोड़ा रहता था। अर्जुन लकड़ी पर नक्काशी करने का काम करता था। एक शाम, काम करते समय अर्जुन के हाथ में चोट लग गई। दर्द बहुत तेज़ था, लेकिन उसने किसी को कुछ नहीं बताया। वह चुपचाप बैठा रहा, उसका चेहरा उदास था। मीरा ने उसकी उदासी को तुरंत पहचान लिया।
मीरा उसके पास आई और प्यार से पूछा, 'अर्जुन, क्या हुआ? तुम इतने चुप क्यों हो?' अर्जुन पहले तो हिचकिचाया, लेकिन मीरा की आँखों में अपने लिए फिक्र देखकर उसने सब बता दिया। 'मीरा, सिर्फ हाथ का दर्द नहीं है, मुझे डर है कि इस सुंदर कलाकृति को मैं पूरा नहीं कर पाऊँगा,' उसने कहा। मीरा ने उसका हाथ थाम लिया और कहा, 'घबराओ मत, हम मिलकर इसे ठीक कर लेंगे।' उस पल अर्जुन को लगा कि उसका सारा दर्द और तनाव गायब हो गया है। उसे समझ आया कि जब कोई आपकी पीड़ा का कारण समझ लेता है, तो वह पीड़ा बोझ नहीं लगती।