पहाड़ों की तलहटी में बसे एक छोटे से गाँव में विशम नाम का एक बुद्धिमान युवक रहता था। वह अपनी सूझबूझ के लिए पूरे गाँव में मशहूर था। एक शाम, जब विशम काम से घर लौट रहा था, उसने देखा कि उसके घर के पास कुछ संदिग्ध साये घूम रहे हैं। ध्यान से देखने पर उसे पता चला कि चार चोर उसके घर पर नज़र रख रहे हैं।
विशम घबराया नहीं, बल्कि उसने एक योजना बनाई। वह चुपचाप घर के अंदर गया और अपनी पत्नी को सारी बात बताई। पत्नी डर गई, लेकिन विशम ने उसे शांत करते हुए कहा, 'डरो मत, मैं इन्हें सबक सिखाऊंगा।'
विशम ने ज़ोर-ज़ोर से बात करना शुरू किया ताकि चोर सुन सकें। 'सुनो, आजकल चोरी बहुत बढ़ गई है, इसलिए हमें अपने सारे सोने के सिक्के और गहने एक भारी संदूक में भरकर सुरक्षित रख देने चाहिए।'
चोरों ने यह सुना और खुश हो गए। विशम एक भारी संदूक लेकर बाहर आया और उसे अपने आंगन के कुएँ में डाल दिया। उस संदूक में सोना नहीं, बल्कि भारी पत्थर थे। विशम ने ज़ोर से कहा, 'अब हमारा खजाना कुएँ के गहरे पानी में सुरक्षित है!'
कुएँ में पानी बहुत ज़्यादा था, इसलिए चोरों का मुखिया बोला, 'घबराओ मत, हम बाल्टियों से पानी बाहर निकाल देंगे, फिर संदूक निकाल लेंगे।'
पूरी रात चोर कुएँ से पानी निकालकर बाहर फेंकते रहे। वह सारा पानी विशम के बगीचे में जा रहा था। विशम और उसकी पत्नी खिड़की से यह सब देख रहे थे। विशम मुस्कुराया और बोला, 'देखो, ये चोर हमारे बगीचे में पानी डाल रहे हैं!'
तभी, विशम द्वारा बुलाए गए पहरेदार वहाँ पहुँच गए और चोरों को रंगे हाथों पकड़ लिया। चोरों को बहुत शर्मिंदगी हुई। उन्हें सोना तो नहीं मिला, लेकिन पूरी रात मेहनत करके बगीचे की सिंचाई करनी पड़ी।
Moral
मुसीबत के समय घबराने के बजाय बुद्धि का प्रयोग करना चाहिए।