विजयनगर के राजा कृष्णदेवराय और उनके चतुर मंत्री तेनाली रामन एक दिन बाजार से गुजर रहे थे। उन्होंने देखा कि शहर के मुख्य कुएं के पास बहुत भीड़ लगी है और लोग काफी परेशान दिख रहे हैं।
राजा ने पूछा, "यहाँ क्या बात है? सब इतने चिंतित क्यों हैं?"
एक बुजुर्ग व्यक्ति ने कहा, "महाराज, इस कुएं से पानी निकालने वाली बाल्टी बार-बार चोरी हो रही है। हम जितनी बार नई बाल्टी लाते हैं, कोई उसे चुरा ले जाता है। हमें समझ नहीं आ रहा कि चोर कौन है।"
राजा ने तेनाली रामन की ओर देखा, "रामन, क्या तुम इस चोर को पकड़ सकते हो?"
तेनाली रामन कुएं के पास गए और मिट्टी में पैरों के निशान देखे। उन्होंने देखा कि एक निशान बहुत गहरा है, जैसे कोई बहुत तेजी से भाग रहा हो। तेनाली के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई।
"महाराज, मेरे पास एक उपाय है," तेनाली ने कहा। "सबसे पहले, हमारे राजसी मोची को बुलाकर लाइए। मैं चाहता हूँ कि वह एक विशेष प्रकार की चप्पल बनाए।"
जब मोची आया, तो तेनाली ने उसे धीरे से एक गुप्त निर्देश दिया। मोची ने बहुत ही बड़े आकार की चप्पलें बनाना शुरू कर दिया। फिर तेनाली ने सुझाव दिया, "महाराज, चोर को पकड़ने के लिए हमें एक गुप्त परीक्षा लेनी होगी। हर ग्रामीण को एक अलग कमरे में जाकर ये चप्पलें पहनकर देखनी होंगी।"
राजा मान गए। गाँव के लोग एक-एक करके कमरे में गए। बाहर आकर सब कहने लगे, "महाराज, ये चप्पलें हमें बिल्कुल सही आ रही हैं!"
तभी एक युवक डरते-डरते बाहर आया और बोला, "महाराज, ये चप्पलें मेरे पैरों में बहुत बड़ी हैं, ये मुझे नहीं आ रही हैं।"
तेनाली रामन ने तुरंत उसकी ओर इशारा किया, "यही चोर है!"
राजा हैरान रह गए, "लेकिन रामन, तुम्हें कैसे पता चला?"
तेनाली हँसते हुए बोले, "महाराज, मैंने मोची से कहा था कि चप्पलें इतनी बड़ी बनाएँ कि वे लगभग किसी के भी पैर में आ सकें। बाकी लोग डर के मारे कह रहे थे कि चप्पलें फिट आ रही हैं, लेकिन चोर ने डर के मारे सच बोल दिया कि चप्पलें उसे बड़ी आ रही हैं।"
राजा तेनाली की बुद्धिमानी से बहुत प्रसन्न हुए और चोर को दंड दिया गया।
Moral
बुद्धिमानी और चतुराई से बड़े से बड़े अपराधी को भी पकड़ा जा सकता है।