विजयनगर साम्राज्य में एक विदेशी व्यापारी आया। उसके पास बहुत ही शानदार अरबी घोड़े थे। वह व्यापारी बहुत घमंडी था। उसने दरबार में आकर कहा, "आपके देश के घोड़े बहुत सुस्त हैं। मेरे घोड़े हवा की गति से दौड़ते हैं!"
राजा कृष्णदेवराय को यह सुनकर बहुत क्रोध आया। उन्होंने चुनौती दी, "एक महीने बाद दौड़ होगी। यदि हमारे घोड़े जीत गए, तो तुम्हें अपने सभी घोड़े हमें देने होंगे। यदि वे हार गए, तो मैं तुम्हें एक नया जहाज और नए घोड़े दूंगा!"
पूरे महीने सभी ने अपने घोड़ों को अच्छा खाना और प्रशिक्षण दिया। तेनाली रामन को भी एक घोड़ा दिया गया, लेकिन वह घोड़ा बहुत ही कमजोर और सुस्त लग रहा था।
दौड़ के दिन, व्यापारी के घोड़े बहुत शक्तिशाली दिख रहे थे। लेकिन तेनाली रामन का घोड़ा बहुत थका हुआ और भूखा लग रहा था। लोग हंसने लगे कि तेनाली ने अपने घोड़े का ध्यान नहीं रखा।
तभी तेनाली रामन ने एक तरकीब निकाली। उन्होंने एक लंबी लकड़ी के सिरे पर ताजी घास का एक गुच्छा बांध दिया। जैसे ही दौड़ शुरू हुई, उन्होंने वह लकड़ी घोड़े के सामने दूर तक पकड़ी। घोड़ा उस घास को खाने के लिए इतनी तेजी से भागा कि वह बाकी सभी घोड़ों को पीछे छोड़ते हुए सबसे पहले जीत गया!
राजा हैरान रह गए। उन्होंने पूछा, "तेनाली, यह कैसे हुआ?" तेनाली मुस्कुराए और बोले, "महाराज, जब किसी के मन में लक्ष्य को पाने की तीव्र भूख होती है, तो वह किसी भी बाधा को पार कर सकता है।" व्यापारी ने अपनी हार मान ली और अपने घोड़े राजा को सौंप दिए।
Moral
बुद्धिमानी और सही योजना से कठिन से कठिन लक्ष्य भी पाया जा सकता है।