एक घने जंगल में एक शक्तिशाली बाघ और एक सीधा-साधा गधा रहते थे। एक दोपहर, घास के मैदान में बैठे हुए गधे ने अचानक कहा, "बाघ भाई, देखो! यह सारी घास बैंगनी रंग की है!"
बाघ हैरान होकर बोला, "तुम क्या कह रहे हो? घास तो हमेशा हरी ही होती है।"
लेकिन गधा अपनी बात पर अड़ा रहा। "नहीं, आप ठीक से देख नहीं रहे हैं। देखिए, यह घास पूरी तरह बैंगनी है!" गधा ज़ोर-ज़ोर से बहस करने लगा।
जब बहस बहुत बढ़ गई, तो वे दोनों जंगल के राजा शेर के पास न्याय के लिए पहुँचे। शेर ने उनकी बात सुनी और गधे की ओर देखकर कहा, "तुम सही कह रहे हो, यह घास बैंगनी ही है। तुम जीत गए, अब तुम जा सकते हो।"
गधा बड़े गर्व के साथ वहाँ से चला गया। गधे के जाने के बाद, शेर ने बाघ की ओर देखा और पूछा, "बाघ, क्या तुम्हें सच में लगता है कि घास बैंगनी है?"
बाघ ने झेंपते हुए कहा, "नहीं महाराज, मुझे पता है कि घास हरी है, पर वह गधा बहुत ज़िद कर रहा था।"
शेर ने गरजते हुए कहा, "तो फिर तुमने अपना और मेरा समय क्यों बर्बाद किया? मूर्खों के साथ बहस करना केवल समय की बर्बादी है। तुमने मेरी सभा में आकर मेरा समय नष्ट किया है, इसलिए सजा के तौर पर तुम्हें अगले दस दिनों तक इस मैदान की हर एक घास के तिनके को गिनकर मुझे दिखाना होगा!"
बाघ को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने समझ लिया कि बेकार की बहस में पड़ना कितना भारी पड़ सकता है।
Moral
मूर्खों के साथ बहस करना समय और ऊर्जा की बर्बादी है।