एक विशाल जंगल में, एक शक्तिशाली शेर अपनी गुफा के बाहर एक बड़े पेड़ की ठंडी छाया में आराम कर रहा था। शेर उस दिन बहुत थका हुआ था। जैसे ही उसने अपनी आँखें मूँद लीं, पास की एक झाड़ी के पीछे से एक लोमड़ी उसे देख रही थी।
शेर को सोते हुए देखकर लोमड़ी ने सोचा, "आज तो शेर बहुत कमज़ोर लग रहा है, मुझे डरने की कोई ज़रूरत नहीं है!"
लोमड़ी के मन में एक शरारत सूझी। उसने शेर को परेशान करने का फैसला किया। पहले, लोमड़ी सूखे पत्तों पर चलकर 'चर-चर' की आवाज़ करने लगी। शेर ने एक आँख खोली, लोमड़ी को देखा और फिर से अपनी आँखें बंद कर लीं। लोमड़ी नहीं मानी। वह पास की एक चट्टान पर चढ़ गई और शेर के पास कूदने लगी। शेर थोड़ा असहज हुआ, लेकिन फिर से लेट गया।
अंत में, लोमड़ी एक पेड़ की टहनी पर चढ़ गई और उसे जोर से हिलाया, जिससे पत्तियाँ सीधे शेर की नाक पर गिरीं। तब शेर ने अपनी दोनों आँखें खोलीं। शेर की आँखों में गुस्सा नहीं, बल्कि एक गहरा तेज था।
शेर ने शांत लेकिन भारी आवाज़ में कहा, "लोमड़ी, मैं अभी थका हुआ हूँ इसलिए शांत हूँ। लेकिन अगर मैं पूरी ताकत में होता, तो तुम जैसी दस लोमड़ियों को एक पल में भगा सकता था। क्या तुम सच में मेरी रफ़्तार देखना चाहती हो?"
शेर की बात सुनकर लोमड़ी के होश उड़ गए। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ कि वह कितनी बड़ी मुसीबत में पड़ सकती थी। शेर की उदारता को समझते हुए, लोमड़ी बिना कुछ कहे वहाँ से दुम दबाकर भाग गई।
Moral
किसी की सहनशीलता को उसकी कमजोरी न समझें।