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Panchatantra Tale

छुटकी खरगोश और डर का सबक

Chutti the Rabbit and the Lesson of Fear

एक घने और हरे-भरे जंगल में छुटकी नाम का एक छोटा खरगोश रहता था। छुटकी बहुत चंचल था, लेकिन उसने कभी जंगल के बड़े जानवरों को नहीं देखा था, इसलिए उसके मन में हमेशा एक छोटा सा डर बना रहता था कि कहीं कोई खत…

5–12 yr 3 min medium
डर लगने पर घबराने के बजाय, शांत दिमाग से सोचें कि क्या वह सच में खतरा है।
छुटकी खरगोश और डर का सबक — NilaTales cover art
5–12 yr 3 min medium
PANCHANTANTRA · aparikshitakarakam

Frame tale: செயலுக்கு முன் சிந்தித்தல் (Think Before You Act)

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एक घने और हरे-भरे जंगल में छुटकी नाम का एक छोटा खरगोश रहता था। छुटकी बहुत चंचल था, लेकिन उसने कभी जंगल के बड़े जानवरों को नहीं देखा था, इसलिए उसके मन में हमेशा एक छोटा सा डर बना रहता था कि कहीं कोई खतरा न आ जाए।

एक दिन, छुटकी ताज़ी घास की तलाश में एक मैदान में गया। अचानक, उसने झाड़ियों के पीछे एक बड़ी परछाईं हिलते हुए देखी। वह जंगल का राजा शेर था! उसे देखते ही छुटकी का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। डर के मारे उसके पैर कांपने लगे और बिना कुछ सोचे-समझे, वह तेज़ी से दौड़कर अपने बिल में छिप गया।

उस रात छुटकी को नींद नहीं आई। वह खुद से नाराज़ था। 'मैं तो खुद को बहादुर समझता था, लेकिन एक परछाईं देखकर ही भाग गया!' उसने दुखी होकर सोचा।

अगले दिन, छुटकी फिर से बाहर निकला। थोड़ी दूर जाते ही उसे सूखी पत्तियों के बीच एक तेज़ आवाज़ सुनाई दी। उसे लगा कि कोई बड़ा जानवर आ रहा है, और डर के मारे वह फिर से भागकर अपने घर आ गया।

उसके दादाजी खरगोश ने उसे हाँफते हुए देखा और पूछा, 'क्या हुआ छुटकी? तुम इतनी तेज़ी से क्यों भाग रहे हो?'

छुटकी ने रोते हुए सब कुछ बता दिया। दादाजी ने उसे प्यार से समझाया, 'छुटकी, डरना कोई बुरी बात नहीं है। डर हमारे शरीर का एक अलार्म है जो हमें सावधान करता है। खतरा महसूस होते ही तुम भाग आए, यह तुम्हारी समझदारी है।'

छुटकी ने उलझन में पूछा, 'तो क्या अगली बार शेर को देखकर मुझे डरना नहीं चाहिए और वहीं खड़ा रहना चाहिए?'

दादाजी मुस्कुराए और बोले, 'नहीं बेटा। जब डर लगे, तो दो बातें याद रखना। अगर खतरा सच में बड़ा है, जैसे कोई शिकारी जानवर, तो तुरंत सुरक्षित जगह भाग जाना सही है। लेकिन अगर डर सिर्फ एक आवाज़ या परछाईं है, तो शांत रहकर पता लगाओ कि वह क्या है। डर से ज़्यादा अपने दिमाग का इस्तेमाल करो।'

अगले दिन छुटकी फिर से मैदान में गया। अचानक फिर से एक आवाज़ आई। छुटकी डरा, लेकिन उसने दादाजी की बात याद की। वह रुका और ध्यान से सुनने लगा। वह कोई जानवर नहीं, बल्कि हवा से हिलती एक टहनी थी। छुटकी मुस्कुराया और आराम से खेलने लगा। अब उसे समझ आ गया था कि कब भागना है और कब बहादुर बनना है।

Moral

डर लगने पर घबराने के बजाय, शांत दिमाग से सोचें कि क्या वह सच में खतरा है।

The Lesson

डर लगने पर घबराने के बजाय, शांत दिमाग से सोचें कि क्या वह सच में खतरा है।

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