एक विशाल जंगल में एक बहुत ही शक्तिशाली शेर रहता था। उसे अपनी ताकत और अपनी दहाड़ पर बहुत घमंड था। एक दोपहर, शेर एक बड़े पेड़ की ठंडी छाया में आराम कर रहा था।
तभी, एक छोटी सी मक्खी शेर की नाक के पास भिनभिनाने लगी। शेर ने गुस्से में अपनी आँखें खोलीं और दहाड़ा, 'तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे परेशान करने की? क्या तुम्हें पता नहीं कि मैं इस जंगल का राजा हूँ!' लेकिन वह छोटी सी मक्खी बिल्कुल नहीं डरी। वह फुर्ती से शेर की नाक पर बैठी और उसे ज़ोर से काट लिया।
शेर ने अपने भारी पंजों से हवा में वार किया, लेकिन मक्खी बहुत तेज़ थी और हर बार बच निकलती। मक्खी को लगा कि उसने एक बहुत बड़ा काम कर दिया है। उसने गर्व से सोचा, 'मैंने जंगल के राजा को हरा दिया! अब मुझसे ज़्यादा ताकतवर कोई नहीं है!'
अपनी जीत की खुशी में चूर होकर, मक्खी बिना सोचे-समझे जंगल में इधर-उधर उड़ने लगी। वह इतनी उत्साहित थी कि उसने ध्यान ही नहीं दिया कि एक पेड़ की टहनी पर मकड़ी ने अपना जाला बुना है। अचानक, मक्खी सीधे उस जाले में जा फंसी। मकड़ी धीरे-धीरे जाल के सहारे नीचे आने लगी। मक्खी ने बहुत कोशिश की, लेकिन वह बहुत देर कर चुकी थी। उसे समझ आ गया कि उसका घमंड ही उसकी सबसे बड़ी दुश्मन बन गया।
Moral
अहंकार इंसान (या जीव) की बुद्धि हर लेता है और पतन का कारण बनता है।