नील पर्वत के जंगल में एक अजीब बीमारी फैल गई। पेड़ सूखने लगे और जानवर कमजोर होने लगे। जंगल की हालत देखकर, शक्तिशाली शेर विक्रम ने एक आपातकालीन सभा बुलाई।
सभी जानवर डरते हुए सभा में इकट्ठा हुए। विक्रम दहाड़ा, "हमारे जंगल में किसी ने बहुत बड़ा पाप किया है। इसीलिए जंगल के देवता क्रोधित हैं और हमें यह बीमारी मिली है। हमें उस पापी को ढूंढकर सजा देनी होगी!"
विक्रम ने आगे कहा, "मैंने जीवित रहने के लिए कई जानवरों का शिकार किया है। मैं सबसे बड़ा पापी हूँ! मुझे सजा दो!" उसने खुद को बचाने के लिए पहले ही यह कह दिया।
तभी बाघ आगे आया और बोला, "महाराज, आप जंगल के राजा हैं। शिकार करना आपका कर्तव्य है, यह पाप नहीं है।" विक्रम ने राहत की सांस ली।
फिर भालू बोला, "मैंने मधुमक्खियों से शहद चुराया है, मैं पापी हूँ!" लेकिन भेड़िए ने तुरंत कहा, "अगर आप शहद न लेते, तो मधुमक्खियां उसे संभाल नहीं पातीं। आपने जंगल का संतुलन बनाए रखा। आपको क्षमा किया जाता है।"
इस तरह शक्तिशाली जानवरों ने अपने छोटे-मोटे अपराध स्वीकार किए और दूसरों के बचाव के कारण माफी पा ली। अंत में, एक छोटा खरगोश कांपते हुए खड़ा हुआ। "मैंने... मैंने एक बार किसान के खेत से एक गाजर चुराई थी," उसने धीरे से कहा।
बड़े जानवर गुस्से से चिल्लाने लगे, "तेरी इस छोटी सी चोरी की वजह से यह बीमारी आई है! तुझे सजा मिलनी चाहिए!" विक्रम ने खरगोश को दंडित करने का आदेश दिया।
एक चतुर बंदर यह सब देख रहा था। उसने महसूस किया कि शक्तिशाली लोग अपने बड़े अपराधों को छिपाने के लिए अपनी शक्ति का उपयोग करते हैं, जबकि कमजोरों की छोटी गलतियों को सजा देने के लिए बड़ा बना दिया जाता है।
Moral
शक्तिशाली के बड़े पाप माफ कर दिए जाते हैं, लेकिन कमजोर की छोटी गलती पर सजा मिलती है।