एक घने और सुंदर जंगल में विक्रम नाम का एक शक्तिशाली बैल रहता था। एक दिन, विक्रम को एक बड़ी गुफा मिली। गुफा के पास ही एक साफ़ पानी की नदी और हरी-भरी घास का मैदान था। विक्रम ने सोचा, 'यह जगह मेरे रहने के लिए सबसे अच्छी है!'
जब विक्रम वहाँ रहने लगा, तो जंगल के अन्य जानवरों ने उसे चेतावनी दी, 'विक्रम, सावधान रहना! यह एक शेर की गुफा है। अगर वह वापस आया, तो बड़ी मुश्किल हो जाएगी।' लेकिन विक्रम को अपनी ताकत पर बहुत घमंड था। उसने हँसते हुए कहा, 'शेर? मैं किसी से नहीं डरता!'
कुछ दिनों बाद, जब विक्रम गुफा के बाहर आराम कर रहा था, तभी एक शेर की दहाड़ सुनाई दी। शेर को देखकर विक्रम एक पल के लिए घबरा गया, लेकिन उसने तुरंत अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करने का फैसला किया। विक्रम ज़ोर से चिल्लाया, 'दोस्तों! हमारे मेहमान आ गए हैं! सब तैयार हो जाओ, आज तो दावत होगी!'
यह सुनकर शेर डर गया। उसने सोचा, 'क्या यहाँ बहुत सारे बैल मुझे खाने के लिए इंतज़ार कर रहे हैं?' वह डर के मारे भागने लगा। भागते समय उसे एक चालाक लोमड़ी मिली। लोमड़ी ने पूछा, 'महाराज, आप इतनी तेज़ क्यों भाग रहे हैं?' शेर ने घबराकर कहा, 'गुफा में बैलों की फौज मेरा इंतज़ार कर रही है!'
लोमड़ी ने एक चाल चली। उसने कहा, 'महाराज, डरो मत। मैं आपके साथ चलती हूँ। ताकि आप डरकर भाग न जाएँ, हम अपनी पूंछों को एक बेल से बाँध लेते हैं।' डरा हुआ शेर मान गया।
जब वे गुफा के पास पहुँचे, तो विक्रम ने ज़ोर से आवाज़ लगाई, 'अरे लोमड़ी भाई! तुमने तो कहा था कि तुम दो शेर लाओगी, पर तुम सिर्फ एक शेर के साथ क्यों आ रही हो?' यह सुनकर शेर को लगा कि लोमड़ी उसे फँसा रही है। वह डर के मारे इतनी तेज़ भागा कि लोमड़ी उसकी पूंछ से बंधी हुई पत्थरों और कांटों में टकराती रही। लोमड़ी की चालाकी उसी पर भारी पड़ गई।
Moral
बिना सोचे-समझे डरना और दूसरों की बातों में आना खतरनाक हो सकता है।