एक घने और हरे-भरे जंगल के किनारे खरगोशों का एक छोटा सा परिवार रहता था। जंगल में कई शिकारी जानवर थे, इसलिए खरगोश माता-पिता अपने बच्चे को हमेशा सतर्क रहना और खतरों को पहचानना सिखाते थे।
एक सुबह, पिता खरगोश भोजन की तलाश में जाने से पहले अपने नन्हे खरगोश को एक गुप्त संकेत के बारे में बताता है। "नन्हे खरगोश, अगर मैं बाहर हूँ और कोई दरवाज़ा खटखटाए, तो तुरंत दरवाज़ा मत खोलना। पहले पूछना, 'क्या जंगल की हवा चल रही है?' और अगर जवाब मिले, 'हाँ, पत्तियाँ नाच रही हैं!', तभी दरवाज़ा खोलना।"
लेकिन एक भूखी लोमड़ी पास की झाड़ी के पीछे छिपकर यह सब सुन रही थी।
जैसे ही पिता खरगोश जंगल में गया, लोमड़ी चुपके से आई और दरवाज़े पर दस्तक दी। नन्हे खरगोश ने सावधानी से पूछा, "कौन है वहाँ?"
लोमड़ी ने चालाकी से पूछा, "क्या जंगल की हवा चल रही है?"
लोमड़ी को गुप्त उत्तर पता था, इसलिए उसने कहा, "हाँ, पत्तियाँ नाच रही हैं!"
नन्हा खरगोश थोड़ा रुका। उसे कुछ अजीब लगा। उसे अपने माता-पिता की सिखाई बातें याद आईं। उसने ज़ोर से कहा, "तुम्हारी आवाज़ बहुत कर्कश है! और मुझे दरवाज़े की दरार से तुम्हारे नुकीले नाखून दिख रहे हैं! तुम एक लोमड़ी हो!"
लोमड़ी डर गई। इससे पहले कि वह कुछ कर पाती, नन्हे खरगोश ने ज़ोर से चिल्लाना शुरू किया, "माँ! पापा! जल्दी आओ! जंगल का राजा शेर आ रहा है!"
शेर का नाम सुनते ही लोमड़ी बुरी तरह डर गई और अपनी जान बचाकर वहाँ से तेज़ी से भाग गई। नन्हे खरगोश की समझदारी से पूरा परिवार सुरक्षित रहा।
Moral
सतर्कता और बुद्धिमानी से किसी भी खतरे से बचा जा सकता है।