एक सुंदर बगीचे में मणि नाम की एक बिल्ली और सोमु नाम का एक बंदर रहते थे। मणि बहुत ही शांत स्वभाव की थी, जबकि सोमु बहुत ही चतुर और शरारती था।
एक शाम, उन्होंने देखा कि आग की आंच पर एक बड़ा और स्वादिष्ट बादाम रखा है। बादाम को देखकर सोमु के मुँह में पानी आ गया, लेकिन वह बहुत गर्म था और उसे छूना नामुमकिन था।
सोमु ने एक चाल चली। उसने मणि से कहा, "मणि, तुम इस पूरे बगीचे में सबसे बहादुर हो! तुम्हारे पंजे कितने मजबूत हैं। केवल तुम ही उस गर्म बादाम को बिना जले बाहर निकाल सकती हो!"
अपनी बहादुरी पर गर्व महसूस करते हुए, मणि आग के पास गई। आग की गर्मी से उसके पंजे जलने लगे। वह दर्द से कराह रही थी, लेकिन सोमु उसे प्रोत्साहित करता रहा, "बस थोड़ा और मणि! तुम तो वीर हो! जल्दी करो!"
आखिरकार, दर्द सहते हुए मणि ने उस बादाम को आग से बाहर धकेल दिया। जैसे ही बादाम जमीन पर गिरा, सोमु झपटकर उसे खा गया। मणि को समझ आ गया कि सोमु ने केवल अपनी भूख मिटाने के लिए उसकी झूठी तारीफ की थी।
Moral
चापलूसी करने वालों से सावधान रहें, वे अपना काम निकालने के लिए आपकी प्रशंसा करते हैं।