एक विशाल जंगल में करिकालन नाम का एक बूढ़ा शेर रहता था। कभी वह जंगल का सबसे शक्तिशाली राजा था, लेकिन अब उम्र के कारण वह शिकार करने में असमर्थ था। भूख से परेशान होकर करिकालन ने एक चालाकी भरी योजना बनाई।
उसने जंगल के सभी जानवरों को बुलाया और घोषणा की, "मैं अब बूढ़ा हो गया हूँ और जंगल का अगला राजा चुनना चाहता हूँ। जो भी मेरी पहेलियों का सही उत्तर देगा, वही अगला राजा बनेगा!"
राजा बनने के लालच में जानवर एक-एक करके शेर की गुफा की ओर आने लगे। लेकिन करिकालन कोई उत्तराधिकारी नहीं, बल्कि अपना भोजन ढूँढ रहा था। वह गुफा के अंदर आने वाले जानवरों को चुपके से पकड़कर खा जाता था। गुफा के अंदर जाने वाले जानवर कभी वापस बाहर नहीं आते थे।
एक दिन गिरि नाम की एक चतुर लोमड़ी प्रतियोगिता में भाग लेने गुफा के पास पहुँची। करिकालन गुफा के द्वार पर बैठा था और बोला, "आओ लोमड़ी! अंदर आओ और अपनी बुद्धिमानी का परिचय दो।"
गिरि जैसे ही अंदर जाने वाली थी, वह अचानक रुक गई। उसने गुफा के मुहाने पर ज़मीन को ध्यान से देखा। गिरि ने कहा, "महाराज! आपकी प्रतियोगिता बहुत अच्छी है, लेकिन मुझे एक अजीब बात दिख रही है। गुफा के अंदर जाने वाले जानवरों के पैरों के निशान तो बहुत हैं, पर गुफा से बाहर आने वाला एक भी निशान नहीं दिख रहा!"
शेर की चाल गिरि समझ गई थी। इससे पहले कि शेर झपट्टा मारता, गिरि तेज़ी से वहाँ से भाग निकली। गिरि ने तुरंत दूसरे जानवरों को भी चेतावनी दे दी। उसके बाद कोई भी जानवर उस धूर्त शेर के जाल में नहीं फँसा।
Moral
धोखाधड़ी करके दूसरों को ठगने वाले अंत में खुद पकड़े जाते हैं।