एक घने जंगल के पास बसे गाँव में रवि नाम का एक चोर रहता था। उसका काम दूसरों की चीज़ें चुराकर पास के शहर में बेचना था। एक दिन उसने मंदिर में एक बड़ी पीतल की घंटी देखी। उसने सोचा, 'अगर मैं इसे चुरा लूँ, तो कई दिनों तक चोरी करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।' उसने घंटी चुराई और जंगल के रास्ते भागने लगा।
जैसे-जैसे रवि आगे बढ़ता, घंटी 'डिंग-डांग' की तेज़ आवाज़ करती। इस शोर से जंगल में सो रहा एक बाघ जाग गया। गुस्से में बाघ रवि के पीछे पड़ गया। डर के मारे रवि ने घंटी नीचे गिरा दी और अपनी जान बचाने के लिए झाड़ियों में छिप गया।
तभी बंदरों का एक झुंड वहाँ आया। उन्होंने घंटी देखी और उसे बजाने लगे। उन्हें वह आवाज़ बहुत पसंद आई। एक शरारती बंदर घंटी उठाकर गाँव के पास वाले एक ऊँचे पेड़ पर चढ़ गया। बंदरों ने मिलकर घंटी को बजाना शुरू कर दिया। इस शोर से गाँव वाले बहुत डर गए।
गाँव वाले राजा के पास मदद के लिए गए। राजा ने घोषणा की, 'जो भी इस शोर को रोकेगा, उसे बड़ा इनाम दिया जाएगा।' तब गाँव की एक बुद्धिमान दादी ने इस समस्या को हल करने की ठानी। वह बाज़ार गईं और एक टोकरी में ताजे फल और मूंगफली लेकर आईं। उन्होंने पेड़ के नीचे टोकरी रखी और ज़मीन पर लेटकर सोने का नाटक करने लगीं।
फलों की खुशबू पाकर बंदर नीचे उतर आए। घंटी वाला बंदर भी घंटी नीचे रखकर फल खाने लगा। मौका पाकर दादी ने झट से घंटी उठाई और गाँव की ओर दौड़ पड़ीं। राजा ने दादी की चतुराई की बहुत प्रशंसा की और उन्हें ढेर सारे पुरस्कार दिए।
Moral
ताकत से ज्यादा बुद्धि काम आती है।