एक घने जंगल में करक नाम का एक शक्तिशाली हिरण रहता था। अन्य हिरणों की तरह वह सारा दिन बस खेलता ही नहीं रहता था, बल्कि वह हमेशा किसी न किसी जरूरी काम में लगा रहता था।
एक सुनहरी दोपहर, करक एक बड़ी चट्टान के पास खड़ा होकर अपने सींगों को रगड़कर तेज़ कर रहा था। तभी वहाँ से एक चतुर लोमड़ी गुजरी और यह देखकर रुक गई।
"अरे करक! तुम यह क्या कर रहे हो?" लोमड़ी ने पूछा। "इतनी सुहावनी धूप है, चारों ओर हरियाली है, फिर तुम क्यों इतनी मेहनत कर रहे हो?"
करक ने शांति से जवाब दिया, "मैं अपने सींगों को नुकीला बना रहा हूँ।"
लोमड़ी हँसते हुए बोली, "पर इसकी क्या ज़रूरत है? अभी तो तुम्हें कोई खतरा नहीं है। तुम इस अच्छे समय को क्यों बर्बाद कर रहे हो?"
करक ने लोमड़ी की आँखों में देखकर कहा, "तुम सही कह रही हो, अभी मैं सुरक्षित हूँ। लेकिन अगर कल कोई शिकारी या कोई जंगली जानवर मुझ पर हमला कर दे, तो उस समय मेरे पास सींग तेज़ करने का वक्त नहीं होगा। मुसीबत आने पर तैयारी करना समझदारी नहीं है, बल्कि मुसीबत आने से पहले तैयार रहना ही बुद्धिमानी है।"
लोमड़ी कुछ देर के लिए चुप हो गई। करक की समझदारी भरी बात सुनकर उसे अपनी गलती का एहसास हुआ।
Moral
मुसीबत आने से पहले तैयारी करना ही बुद्धिमानी है।