हरे-भरे खेतों से घिरे एक सुंदर गाँव में कधीर नाम का एक लड़का रहता था। कधीर बहुत मेहनती था और खेती के कामों में हमेशा अपने माता-पिता की मदद करता था। उसके दादाजी अक्सर कहते थे, "मेहनत से कमाया हुआ धन स्थायी होता है, लेकिन शॉर्टकट से मिला धन परछाई की तरह होता है।"
एक दिन, जब कधीर जंगल के किनारे अपनी भेड़ों को चरा रहा था, उसने एक पुराने बरगद के पेड़ के नीचे कुछ चमकते हुए देखा। पास जाने पर उसने देखा कि वह एक सुंदर नीला पत्थर था। जैसे ही उसने उसे छुआ, पेड़ धीरे से बोला, "नन्हे बालक, यह एक जादुई पत्थर है। यदि तुम अपनी सच्ची ज़रूरत मांगोगे, तो यह तुम्हें वह दे देगा।"
कधीर एक सीधा-साधा लड़का था, इसलिए उसे फालतू की सुख-सुविधाओं का कोई शौक नहीं था। वह उस पत्थर को अपने घर ले आया। एक दिन उसका दोस्त रवि उसके घर आया। कधीर ने रवि को जादुई पत्थर के बारे में बता दिया। अगले दिन जब कधीर भेड़ों को चराने गया, तो रवि उस पत्थर को लेकर गाँव के बीचों-बीच आ गया।
"यह पत्थर जो भी मांगो, वह दे देता है!" रवि चिल्लाया। गाँव वाले बहुत उत्साहित और लालची हो गए। किसी ने बहुत सारा सोना माँगा, तो किसी ने कीमती गहने। कुछ ही घंटों में पूरा गाँव सोने और हीरों से भर गया। सभी लोगों ने खेती करना छोड़ दिया और बस उस धन का आनंद लेने लगे।
लेकिन कुछ ही दिनों में स्थिति बिगड़ गई। क्योंकि कोई भी खेतों में काम नहीं कर रहा था, इसलिए फसलें नहीं उगाई जा रही थीं। धीरे-धीरे गाँव में अनाज की कमी होने लगी। लोग अमीर तो थे, लेकिन भूख से तड़पने लगे। उन्हें समझ आया कि सोने से पेट नहीं भरा जा सकता।
घबराए हुए लोग कधीर के पास दौड़कर आए। "कधीर, हमें बचा लो! हमसे बहुत बड़ी गलती हो गई," उन्होंने गिड़गिड़ाते हुए कहा।
कधीर ने शांति से कहा, "यह धन हमने कमाया नहीं है, इसलिए यह हमारे पास नहीं टिकेगा। चलो, उस जादुई पत्थर से कहते हैं कि जो कुछ भी हमने माँगा था, वह उसे वापस ले ले।"
गाँव वाले पत्थर के पास गए और प्रार्थना की कि वह सारा सोना और गहने वापस ले ले। देखते ही देखते सारा खजाना गायब हो गया। लोग वापस अपने खेतों की ओर लौट गए और मेहनत करने लगे। अब वे सोने के पीछे नहीं, बल्कि अपनी मेहनत की रोटी के पीछे भागने लगे और सुखी रहने लगे।
Moral
मेहनत की कमाई ही सच्ची संपत्ति है; लालच हमेशा नुकसान पहुँचाता है।