एक शांत गाँव में अरुण नाम का एक दयालु किसान रहता था। वह सभी जीव-जंतुओं पर दया करता था। एक दिन, अरुण ने अपने खेत में अनाज के बीज बोए और फिर आराम करने के लिए एक पेड़ की छाया में बैठ गया।
पास के एक पेड़ पर कुछ उल्लू बैठे थे। जैसे ही अरुण की आँख लगी, उल्लू नीचे उतर आए और उन्होंने बीज खाना शुरू कर दिया।
जब अरुण की आँख खुली, तो उसने देखा कि उसकी मेहनत बर्बाद हो रही है। उसने एक छोटी सी लकड़ी उठाई और उल्लुओं को भगाने की कोशिश की। लेकिन उल्लू समझदार थे, उन्होंने देखा कि लकड़ी से उन्हें कुछ नहीं होगा, इसलिए वे बिना डरे बीज खाते रहे।
गुस्से में आकर अरुण ने सोचा कि उसकी दयालुता को उसकी कमजोरी समझा जा रहा है। उसने एक भारी पत्थर उठाया। जब उसने पत्थर फेंका, तो वह एक उल्लू पर जोर से लगा और वह घायल होकर गिर गया। बाकी उल्लू डरकर भाग गए। अरुण को समझ आया कि अपनी मेहनत की रक्षा करने के लिए कभी-कभी सख्ती भी जरूरी होती है।
Moral
अपनी जिम्मेदारी निभाते समय अत्यधिक कोमलता हानिकारक हो सकती है।