एक सुंदर नदी के किनारे रवि नाम का एक गरीब मछुआरा रहता था। वह रोज़ सुबह नदी में मछली पकड़ने जाता और उन्हें बाज़ार में बेचकर अपने परिवार का पेट पालता था। रवि बहुत मेहनती था, लेकिन कभी-कभी उसका दिन अच्छा नहीं बीतता था।
एक दिन सुबह से ही रवि की किस्मत खराब चल रही थी। उसने घंटों तक इंतज़ार किया, लेकिन उसकी मछली पकड़ने वाली छड़ में एक भी मछली नहीं फंसी। सूरज सिर पर आ गया था और रवि को चिंता होने लगी, 'अगर आज मछली नहीं मिली, तो मैं अपने बच्चों के लिए खाना कैसे लाऊँगा?'
हार मानकर उसने सोचा कि एक आखिरी कोशिश की जाए। उसने अपनी छड़ी को नदी के गहरे हिस्से में डाला। अचानक, छड़ी ज़ोर से हिली! रवि ने पूरी ताकत लगाकर उसे खींचा और देखा कि उसके हाथ में एक छोटी सी, चमकती हुई सुनहरी मछली थी। वह बहुत सुंदर थी, पर आकार में बहुत छोटी थी।
तभी वह छोटी मछली बोलने लगी! 'प्यारे मछुआरे, कृपया मुझे छोड़ दो! मैं अभी बहुत छोटी हूँ। अगर तुम मुझे अभी खा लोगे, तो तुम्हारा पेट नहीं भरेगा। मुझे नदी में वापस जाने दो, मैं बड़ी होकर एक बहुत बड़ी मछली बन जाऊँगी। तब तुम आकर मुझे पकड़ लेना और तुम्हें बहुत सारा खाना मिलेगा!'
रवि ने उस नन्ही मछली की ओर देखा और मुस्कुराया। उसने शांति से कहा, 'नन्ही मछली, मैं तुम्हारे वादे के झांसे में नहीं आऊँगा। आज मुझे पूरे दिन एक भी मछली नहीं मिली है। अभी मेरे हाथ में जो यह छोटी मछली है, वही आज के लिए मेरा एकमात्र सहारा है। तुम कल बड़ी बनोगी या नहीं, मुझे नहीं पता। लेकिन यह छोटी मछली आज मेरे परिवार का पेट ज़रूर भर देगी।'
रवि उस मछली को बाज़ार ले गया और उसे बेचकर अपने परिवार के लिए खाना खरीद लाया। उसने सीखा कि भविष्य के बड़े वादों के पीछे भागने से बेहतर है कि जो हमारे पास अभी है, उसका उपयोग किया जाए।
Moral
भविष्य के बड़े और अनिश्चित वादों से बेहतर है कि वर्तमान का छोटा लाभ प्राप्त किया जाए।