एक विशाल जंगल में लियो नाम का एक शक्तिशाली शेर रहता था। एक दिन, लियो ने एक हिरण का शिकार किया। शिकार के दौरान, हिरण का एक नुकीला सींग शेर के मुँह में चुभ गया। दर्द से परेशान होकर शेर गुस्से में दहाड़ा, 'आज से इस जंगल में सींग वाला कोई भी जानवर नहीं रहेगा! तुम सब अभी इसी वक्त यहाँ से चले जाओ!'
शेर की बात सुनकर हिरण, बकरी और अन्य सींग वाले जानवर डर गए और जंगल छोड़कर दूसरे जंगल में चले गए। कुछ दिनों बाद, पिप नाम का एक छोटा खरगोश भोजन की तलाश में उस नए जंगल में आया। शाम का समय था और सूरज ढल रहा था। जब पिप घास के मैदान में दौड़ रहा था, तो उसकी लंबी कानों की परछाईं ज़मीन पर दो सींगों की तरह दिखाई देने लगी। अपनी ही परछाईं को देखकर पिप बुरी तरह डर गया और चिल्लाया, 'ओह नहीं! मेरे सींग निकल आए हैं! शेर मुझे पकड़ लेगा!' वह डर के मारे इधर-उधर भागने लगा।
पिप भागते हुए नए जंगल के हिरणों के पास पहुँचा और रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। तब एक बूढ़े हिरण ने शांति से कहा, 'नन्हे पिप, अगर तुम पुराने जंगल में होते, तो शायद शेर तुम्हें सींगों के कारण मार देता। लेकिन यहाँ तुम सुरक्षित हो, फिर भी तुम अपनी ही परछाईं से डर रहे हो। अगर तुम अपनी परछाईं से भी डरते हो, तो तुम्हें दुनिया में कहीं भी शांति नहीं मिलेगी।'
पिप को समझ आ गया कि उसका डर ही उसका सबसे बड़ा दुश्मन है। उसने गहरी साँस ली और शांत रहने की कोशिश की।
Moral
डर हमारे मन का भ्रम है; जो व्यक्ति डरता है, उसे कहीं भी शांति नहीं मिलती।