जंगल में भीषण सूखा पड़ा था, जिससे सभी जानवर भूख से व्याकुल थे। जीवित रहने के लिए एक शेर, एक लोमड़ी और एक भेड़िया मिलकर शिकार करने और भोजन बाँटने का फैसला किया।
कुछ दिनों की मेहनत के बाद, भेड़िये ने एक हिरण का पीछा किया। लोमड़ी ने अपनी चतुराई से हिरण के भागने के सारे रास्ते बंद कर दिए। अंत में, शेर ने अपनी शक्ति से हिरण का शिकार कर लिया। लंबे समय बाद उन्हें भरपेट भोजन मिलने वाला था।
शिकार के बाद, भेड़िये ने मांस के टुकड़े किए और लोमड़ी ने उन्हें तीन बराबर हिस्सों में बाँट दिया। शेर ने पहला हिस्सा उठाते हुए दहाड़कर कहा, "मैं इस जंगल का राजा हूँ, इसलिए पहला हिस्सा मेरा है!" फिर उसने दूसरा हिस्सा भी छीन लिया और कहा, "मैं सबसे ताकतवर हूँ, इसलिए यह हिस्सा भी मेरा है!"
जब शेर तीसरा हिस्सा खाने लगा, तो भेड़िये ने हिम्मत जुटाकर पूछा, "महाराज, हमने मिलकर शिकार किया है, फिर आप अकेले ही सब क्यों खा रहे हैं?"
शेर गुस्से में भेड़िये पर झपटने लगा। यह देखकर लोमड़ी शांति से बोली, "महाराज, क्रोध करने से बेहतर है कि आप सोच-समझकर निर्णय लें। मैं अब तक सुरक्षित इसलिए हूँ क्योंकि मैं सही समय पर चुप रहना जानती हूँ।"
लोमड़ी की बुद्धिमानी देखकर शेर को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने समझ लिया कि लोमड़ी बहुत चालाक है और उससे उलझना ठीक नहीं होगा। शेर ने शांति बनाए रखने के लिए तीसरा हिस्सा लोमड़ी को दे दिया।
Moral
ताकत से ज्यादा बुद्धि और समझदारी काम आती है।