घने जंगल के बीच एक संकरा रास्ता था। सोमू और रघु नाम के दो दोस्त उस रास्ते पर चल रहे थे। सोमू बहुत लालची था, जबकि रघु एक शांत और ईमानदार व्यक्ति था।
अचानक सोमू का पैर किसी चीज़ से टकराया। नीचे देखने पर उसे रेशम की एक छोटी सी थैली मिली। जब उसने उसे खोला, तो उसकी आँखें चमक उठीं। उसमें सोने के सिक्के भरे हुए थे! "रघु, देखो! हम कितने भाग्यशाली हैं! यह सोना हमारी ज़िंदगी बदल देगा! क्योंकि यह मुझे मिला है, इसलिए यह सिर्फ मेरा है!" सोमू उत्साह से चिल्लाया।
रघु ने शांति से कहा, "सोमू, यह हमें साथ में मिला है। हमें इसे आपस में बाँट लेना चाहिए।"
तभी दूर से सैनिकों के कदमों की आहट सुनाई दी। "ठहरो! क्या तुम लोगों ने वह थैली चुराई है?" चिल्लाते हुए सैनिक उनकी ओर आए। सोमू समझ गया कि वह थैली एक व्यापारी की थी जो खो गई थी।
सोमू डर गया और उसने एक चालाकी भरी बात कही। "रघु, अगर सैनिकों ने हमें पकड़ लिया, तो हम जेल चले जाएंगे। तुम कह देना कि यह थैली तुम्हें मिली है, और मैं कह दूँगा कि मैं बस तुम्हारे साथ चल रहा था। इससे तुम बच जाओगे!" सोमू ने फुसफुसाते हुए कहा।
रघु को सोमू का असली चेहरा दिख गया। उसे समझ आ गया कि सोमू सिर्फ अपने बारे में सोच रहा है। रघु ने उदास होकर कहा, "तुम अपनी गलती का दोष मुझ पर डालना चाहते हो," और वह वहाँ से हट गया। सोमू ने अकेले थैली लेकर भागने की कोशिश की, लेकिन सैनिकों ने उसे घेर लिया। अपने दोस्त को धोखा देने की कोशिश में सोमू मुसीबत में फँस गया।
Moral
लालच और विश्वासघात हमेशा नुकसान पहुँचाते हैं।