एक विशाल जंगल में एक शक्तिशाली शेर रहता था। उसके पीछे-पीछे हमेशा एक लोमड़ी और एक कौआ रहते थे। शेर जो शिकार करता, उसके बचे हुए हिस्से को ये दोनों खाते थे। इसी तरह वे अपना पेट भरते थे।
एक दिन, जब शेर जंगल के किनारे टहल रहा था, उसने एक लकड़हारे को पेड़ काटते देखा। आमतौर पर जानवर इंसान को देखकर भाग जाते हैं, लेकिन लकड़हारा डरा नहीं। उसने मुस्कुराकर कहा, "नमस्ते शेर राजा!"
शेर हैरान रह गया। उसने दहाड़ते हुए पूछा, "क्या तुम्हें मुझसे डर नहीं लगता?"
लकड़हारे ने शांति से जवाब दिया, "डरने से क्या होगा? मैं रोज़ आपके लिए स्वादिष्ट अनाज का भोजन लाऊँगा। यह आपकी सेहत के लिए अच्छा होगा।"
शेर को पहले तो यकीन नहीं हुआ, लेकिन जब उसने वह भोजन चखा, तो उसे वह बहुत पसंद आया। धीरे-धीरे शेर और लकड़हारे के बीच एक अनोखी दोस्ती हो गई। लेकिन लकड़हारे ने एक शर्त रखी, "शेर राजा, हमारी यह दोस्ती एक रहस्य रहनी चाहिए। आप जब भी मेरे पास आएँ, अकेले आएँ। किसी और जानवर को साथ न लाएँ।"
शेर ने वादा किया। लेकिन लोमड़ी और कौआ शक करने लगे। कौआ बोला, "अगर शेर शिकार करना छोड़ देगा, तो हम क्या खाएंगे?" लोमड़ी ने सोचा कि क्यों न हम भी उस स्वादिष्ट भोजन का मज़ा लें।
अगले दिन, लोमड़ी और कौआ शेर को बहला-फुसलाकर लकड़हारे के पास ले आए। लकड़हारे ने जब उन्हें आते देखा, तो वह डर गया और तुरंत पेड़ पर चढ़ गया।
शेर ने दुखी होकर पूछा, "मित्र, तुम क्यों भाग रहे हो?"
लकड़हारे ने ऊपर से कहा, "तुमने अपना वादा तोड़ दिया। मैंने तुम पर भरोसा किया था क्योंकि तुम अकेले आते थे। लेकिन अगर तुम दूसरों को भी साथ लाओगे, तो मैं तुम पर भरोसा नहीं कर पाऊँगा। बिना भरोसे की दोस्ती नहीं चलती।"
शेर को अपनी गलती का अहसास हुआ। लकड़हारा फिर से शेर को खाना देने लगा, लेकिन लोमड़ी और कौआ भूखे ही रह गए।
Moral
वादा निभाना ही सच्ची दोस्ती की पहचान है।