एक घने और हरे-भरे जंगल में पिप नाम की एक छोटी सी नीली चिड़िया रहती थी। पिप बहुत ही खुशमिजाज थी। हर सुबह जब सूरज की पहली किरणें जंगल में आतीं, पिप अपने नन्हे पंख फड़फड़ाती और मीठे गीत गाते हुए पेड़ों की टहनियों पर झूमती थी। उसका गाना सुनकर पूरा जंगल मंत्रमुग्ध हो जाता था।
एक दिन, आसमान में ऊँचा उड़ने वाले कुछ बड़े बाज़ और शानदार मोर नीचे आए। उन्होंने पिप को नाचते हुए देखा और उसका मज़ाक उड़ाने लगे। "देखो इस नन्हीं सी चिड़िया को!" एक बाज़ ने हँसते हुए कहा। "तुम अपना समय इस नाच-गाने में क्यों बर्बाद करती हो? क्या तुम हमारी तरह बादलों को छू सकती हो? या हमारी तरह शिकार कर सकती हो? तुम तो बहुत ही छोटी और कमज़ोर हो!"
बड़ी पक्षियों की इन बातों से पिप का दिल टूट गया। वह बहुत उदास हो गई और एक कोने में बैठकर रोने लगी। उसे लगा कि उसका छोटा होना ही उसकी सबसे बड़ी कमी है। वह सोचने लगी, "काश मैं भी बड़ी होती!"\n तभी वहाँ एक बुद्धिमान बूढ़ा उल्लू आया। उसने पिप को रोते हुए देखा और पास आकर पूछा, "क्या हुआ नन्हीं पिप? तुम इतनी उदास क्यों हो?"
पिप ने रोते हुए सारी बात बताई। उल्लू ने प्यार से समझाया, "पिप, जब तुम अपनी तुलना दूसरों से करती हो, तभी तुम्हें दुख होता है। भगवान ने हर जीव को एक खास गुण दिया है। उन बड़े पक्षियों के पास ऊँचा उड़ने की शक्ति है, लेकिन उनके पास तुम्हारे जैसा सुरीला गला नहीं है। तुम्हारी यही कला तुम्हारी सबसे बड़ी ताकत है।"
पिप ने पूछा, "तो क्या मुझे उन्हें अपनी काबिलियत साबित करनी चाहिए?"
उल्लू ने मुस्कुराते हुए कहा, "नहीं! तुम्हें किसी को कुछ साबित करने की ज़रूरत नहीं है। अगर लोग तुम्हारा मज़ाक उड़ाते हैं, तो उनकी बातों पर ध्यान मत दो। बस वही करो जो तुम्हें खुशी देता है। जब तुम खुद पर विश्वास करना सीख जाओगी, तो दुनिया तुम्हें सम्मान देगी।"
उल्लू की बात पिप के दिल में उतर गई। उसने तय किया कि वह दूसरों की बातों की परवाह नहीं करेगी। उस दिन के बाद से, पिप और भी उत्साह से गाने और नाचने लगी। उसकी खुशी देखकर जंगल के अन्य छोटे पक्षी भी उसके साथ मिलकर खुशी-खुशी रहने लगे।
Moral
अपनी तुलना दूसरों से न करें; अपनी विशिष्टता को पहचानें और खुश रहें।