एक घने और हरे-भरे जंगल में, एक शक्तिशाली तेंदुआ और एक चतुर लोमड़ी गहरे दोस्त बनकर रहते थे। तेंदुआ शिकार करने में माहिर था, जबकि लोमड़ी को जंगल के रास्तों और छिपने की जगहों का बखूबी ज्ञान था। वे दोनों मिलकर शिकार करते और मिल-जुलकर रहते थे।
एक दोपहर, एक विशाल बरगद के पेड़ के नीचे आराम करते समय, तेंदुए को अपने रूप पर बहुत गर्व होने लगा। उसने अपनी खाल देखते हुए कहा, "देखो लोमड़ी! मेरे शरीर पर ये काले धब्बे कितने सुंदर चमक रहे हैं। इस पूरे जंगल में मुझसे सुंदर कोई नहीं है।"
लोमड़ी ने विनम्रता से मुस्कुराते हुए कहा, "आप सच में बहुत शानदार दिखते हैं, तेंदुए महाराज।"
तेंदुए का घमंड बढ़ता ही गया। उसने लोमड़ी की घनी और सुंदर पूंछ देखी और पूछा, "तुम्हारी पूंछ भी बहुत सुंदर है, लोमड़ी। फिर तुम इसके बारे में कभी गर्व क्यों नहीं करती? तुम हमेशा इतनी साधारण क्यों बनी रहती हो?"
लोमड़ी ने शांति से उत्तर दिया, "मेरे दोस्त, सुंदरता केवल देखने में अच्छी लगती है, लेकिन संकट के समय सुंदरता काम नहीं आती। मेरे पास एक सुंदर पूंछ तो है ही, लेकिन उससे भी बड़ी चीज़ मेरे पास मेरी बुद्धिमानी है। इसी चतुराई के कारण मैं तुम्हारे जैसे शक्तिशाली शिकारी के साथ बिना डरे दोस्ती निभा पाती हूँ।"
तेंदुआ हैरान होकर बोला, "सुंदरता और बुद्धि का क्या संबंध है?"
लोमड़ी ने समझाया, "सब कुछ है! अगर मैं तुम्हारे जैसे ताकतवर जानवर के सामने अपनी सुंदरता की डींगें हांकूँगी, तो शायद तुम्हें बुरा लग जाए या तुम्हें गुस्सा आ जाए। और गुस्सा आने पर तुम मुझे नुकसान पहुँचा सकते हो। इसलिए, मैं अपनी सुंदरता के बजाय अपनी बुद्धि पर भरोसा करना बेहतर समझती हूँ। बुद्धि ही जीवन की असली सुरक्षा है।"
तेंदुए को लोमड़ी की बात समझ आ गई और उसने महसूस किया कि केवल सुंदर दिखना ही काफी नहीं है, बल्कि बुद्धिमान होना भी बहुत जरूरी है।
Moral
बाहरी सुंदरता से कहीं अधिक मूल्यवान बुद्धि और चतुराई है।