एक घने जंगल में कविन नाम का कछुआ और स्नेहा नाम की लोमड़ी पक्के दोस्त थे। स्नेहा बहुत फुर्तीली थी, लेकिन कविन हमेशा अपने भारी खोल (shell) को लेकर दुखी रहता था।
"स्नेहा, यह भारी खोल मेरे लिए क्यों है?" कविन ने एक दिन आह भरते हुए कहा। "बाकी जानवर कितनी तेज़ी से दौड़ते हैं! इस भारी खोल की वजह से मैं न तो तेज़ दौड़ सकता हूँ और न ही कहीं आसानी से जा सकता हूँ।"
स्नेहा ने उसे प्यार से समझाया, "कविन, प्रकृति ने हर जीव को एक विशेष उपहार दिया है। तुम्हारा खोल कोई बोझ नहीं है, बल्कि यह तुम्हारी रक्षा करने वाला एक कवच है।"
लेकिन कविन को इस बात पर यकीन नहीं था।
एक शाम, जब वे जंगल के किनारे टहल रहे थे, कविन ने देखा कि एक शिकारी झाड़ियों के पीछे छिपकर स्नेहा पर निशाना साध रहा है! शिकारी ने तीर छोड़ दिया! अपने दोस्त को बचाने के लिए कविन तुरंत स्नेहा के सामने आकर खड़ा हो गया। 'ठक!' तीर कविन के खोल से टकराया। खोल इतना मज़बूत था कि तीर टूटकर ज़मीन पर गिर गया। कविन को थोड़ा दर्द हुआ, लेकिन वह सुरक्षित था।
स्नेहा डर के मारे ज़ोर से चिल्लाई, जिसे सुनकर शिकारी घबरा गया और वहाँ से भाग गया।
स्नेहा दौड़कर कविन के पास आई और बोली, "कविन! तुमने मेरी जान बचा ली! तुम्हारे खोल ने तीर को रोक लिया!"
कविन मुस्कुराया और बोला, "देखा स्नेहा, यह भारी तो है, लेकिन बहुत शक्तिशाली भी है।"
स्नेहा की आँखों में आँसू आ गए, "तुम सही थे। आज तुम्हारे इस 'बोझ' ने ही हमें बचाया है। तुम्हारा यह कवच ही तुम्हारी सबसे बड़ी ताकत है।"
उस दिन के बाद से, कविन ने कभी अपने खोल के बारे में शिकायत नहीं की। उसे समझ आ गया था कि जिसे वह अपनी कमजोरी समझता था, वही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है।
Moral
हमारी कमियाँ, जिन्हें हम बोझ समझते हैं, कभी-कभी हमारी सबसे बड़ी ताकत साबित होती हैं।