एक सुंदर गाँव में दो घर पास-पास थे। पहले घर में हमेशा शोर-शराबा और झगड़े होते रहते थे। छोटी-छोटी बातों पर भी घर के लोग एक-दूसरे पर चिल्लाते थे। इसके विपरीत, दूसरा घर हमेशा शांत और खुशहाल रहता था।
पहले घर के मुखिया सोमू अपने परिवार के झगड़ों से बहुत परेशान थे। उन्होंने सोचा, 'हम अपने पड़ोसियों की तरह शांति से कैसे रह सकते हैं?' एक दिन उन्होंने चुपके से पड़ोसी के घर की खिड़की से झाँककर देखा।
उन्होंने देखा कि दूसरे घर के मुखिया रवि ने गलती से पानी का एक गिलास गिरा दिया। पानी फैलते ही रवि के बच्चे दौड़कर आए और बोले, 'पिताजी, हमसे गलती हो गई, कृपया हमें माफ कर दीजिए!' फिर रवि की पत्नी ने आकर कहा, 'यह मेरी लापरवाही थी, मैं इसे साफ कर देती हूँ।' रवि ने किसी पर गुस्सा करने के बजाय शांति से कहा, 'कोई बात नहीं, गलतियाँ हो जाती हैं, चलो मिलकर इसे साफ करते हैं।'
यह देखकर सोमू को एक बड़ी बात समझ आई। उन्होंने महसूस किया कि जब कोई गलती होती है, तो यह बहस करने का कोई फायदा नहीं कि किसकी गलती है। असली शांति तो गलती को स्वीकार करने और उसे सुधारने में है।
सोमू तुरंत घर गए और अपनी पत्नी से कहा, 'आज सुबह जो झगड़ा हुआ, उसके लिए मैं माफी चाहता हूँ। वह मेरा ही गुस्सा था।' सोमू का व्यवहार देखकर उनकी पत्नी ने भी अपनी गलती के लिए माफी मांगी। धीरे-धीरे, उस घर में भी शांति और खुशहाली छा गई।
Moral
गलतियों को स्वीकार करना और उन्हें सुधारना ही शांति का मार्ग है।