कविन एक युवा कामकाजी व्यक्ति था। एक शनिवार की शाम, वह अपने गाँव जाने के लिए बस स्टैंड पहुँचा। लेकिन बस आने में देरी हो रही थी। भूख लगने के कारण, उसने पास की एक गली में कुछ खाने का फैसला किया।
चलते समय, उसने एक पुरानी दीवार के पास दो छोटे बच्चों को बैठे देखा। उनके कपड़े फटे हुए थे और वे बहुत उदास लग रहे थे। उन्हें देखकर कविन को बहुत दया आई। उसने अपने बटुए से दस रुपये निकाले और उन्हें देते हुए कहा, 'लो, इससे कुछ खा लेना।'
कुछ दूर चलने के बाद, कविन का मन बेचैन हो गया। उसने सोचा, 'क्या दस रुपये में उनका पेट भर पाएगा? कहीं ऐसा न हो कि वे बस कुछ बिस्कुट खा लें और फिर से भूखे रह जाएं।' उन बच्चों के चेहरे उसके दिमाग से नहीं निकल रहे थे।
बिना देर किए, कविन वापस मुड़ा और उन बच्चों के पास गया। उसने उन्हें प्यार से बुलाया और पास के एक छोटे से भोजनालय में ले गया। उसने उन्हें गरमा-गरम और पौष्टिक भोजन खिलाया। बच्चों को खुशी-खुशी खाते देख कविन के मन को जो सुकून मिला, वह अनमोल था।
जब वह बस में बैठा, तो उसे एक गहरी शांति महसूस हुई। उसने समझा कि दूसरों की मदद करना केवल देना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनकी ज़रूरत पूरी हो। उसने महसूस किया कि अच्छाई का काम एक बीज की तरह है, जो सही समय आने पर सुखद परिणाम देता है।
Moral
सच्ची मदद वही है जो किसी की ज़रूरत को वास्तव में पूरा करे।