एक घने जंगल के किनारे, कराल नाम का एक मेहनती भालू रहता था। कराल का बस एक ही सपना था—अपने परिवार के लिए एक बड़ा घर बनाना और ढेर सारा भोजन जमा करना। वह हर दिन सुबह से शाम तक जंगल में घूम-घूम कर शहद और मीठे फल इकट्ठा करता था।
धीरे-धीरे उसकी मेहनत रंग लाई और उसका परिवार बहुत संपन्न हो गया। लेकिन इस भागदौड़ में कराल एक बड़ी गलती कर बैठा। वह अपने बच्चों, चीकू और मीकू के साथ समय बिताना भूल गया। जब भी बच्चे उसके पास खेलने आते, वह कहता, 'अभी नहीं, मैं बहुत थक गया हूँ, कल बात करेंगे।'
एक दिन, कराल के मालिक, एक विशाल हाथी, अपने छोटे से बच्चे के साथ कराल से मिलने आए। उस नन्हे हाथी के बच्चे ने कराल के पैरों के पास आकर बड़े प्यार से खेलना शुरू किया। उस नन्हे जीव की मासूम मुस्कान देखकर कराल का दिल भर आया। उसे अहसास हुआ कि वह भविष्य बनाने के चक्कर में अपना वर्तमान खो रहा है।
उस शाम जब कराल घर पहुँचा, तो उसने देखा कि उसके बच्चे अब बड़े हो गए हैं। जब उसने उनके साथ बैठने की कोशिश की, तो उन्होंने कहा, 'पिताजी, आप हमेशा काम में ही व्यस्त रहते हैं, हमारे पास बैठने के लिए आपके पास समय ही नहीं है।' तब कराल को समझ आया कि दुनिया का सारा शहद और फल भी उन पलों की भरपाई नहीं कर सकते जो उसने अपने बच्चों के साथ नहीं बिताए।
Moral
धन से सुख-सुविधाएं खरीदी जा सकती हैं, लेकिन अपनों के साथ बिताया गया समय नहीं।