तपती हुई गर्मी का दिन था। एक ज्ञानी व्यक्ति एक छोटे से गाँव से गुजर रहे थे। सूरज की तेज़ धूप के कारण उन्हें बहुत प्यास लगी थी। चलते-चलते उन्होंने एक पुराने कुएं के पास एक वृद्ध व्यक्ति और उनके बेटों को देखा।
वे सभी कुएं से बाल्टियों में पानी भरकर बड़े बर्तनों में भर रहे थे। ज्ञानी व्यक्ति यह देखकर हैरान रह गए कि जब लोग मशीनों का उपयोग कर सकते हैं, तो वे इतनी मेहनत क्यों कर रहे हैं।
उन्होंने वृद्ध व्यक्ति से पूछा, "मित्र, आप और आपके बेटे इतनी मेहनत क्यों कर रहे हैं? क्या आप पानी निकालने के लिए किसी मशीन या चरखी का उपयोग नहीं कर सकते? इससे काम आसान हो जाएगा।"
वृद्ध व्यक्ति ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया, "आप सही कह रहे हैं, महोदय। मशीन से काम जल्दी हो जाएगा, लेकिन मशीनें हमारे शरीर को आलसी बना देती हैं। मैं बचपन से ही रोज़ पानी भरने का यह काम करता आ रहा हूँ। इसी वजह से, अस्सी साल की उम्र में भी मेरा शरीर बहुत मजबूत और स्वस्थ है।"
उन्होंने अपने बेटों की ओर देखते हुए कहा, "मैं चाहता हूँ कि मेरे बेटे भी मेरी तरह स्वस्थ और बलवान बनें। इसीलिए मैं उन्हें यह मेहनत करना सिखा रहा हूँ। शारीरिक श्रम के बिना शरीर धीरे-धीरे कमजोर हो जाता है।"
ज्ञानी व्यक्ति उस पिता के विचार और उनकी मेहनत की भावना को देखकर बहुत प्रभावित हुए।
Moral
शारीरिक श्रम ही उत्तम स्वास्थ्य की कुंजी है।