एक सुंदर से गाँव में माया नाम की एक छोटी लड़की रहती थी। माया के पास दूसरे बच्चों की तरह महंगे खिलौने या चमकते हुए कपड़े नहीं थे। उसका संसार उसका छोटा सा बगीचा और वहाँ चहचहाते पक्षी ही थे। वह अपनी माँ के साथ बहुत सादगी से रहती थी।
एक दिन, गाँव की कुछ लड़कियाँ माया का मज़ाक उड़ाने लगीं। उन्होंने सुंदर रेशमी कपड़े पहने थे। एक लड़की ने हँसते हुए कहा, "देखो माया के कपड़े कितने पुराने और फीके हैं! तुम हमारे साथ कैसे खेल सकती हो?" माया का दिल टूट गया और वह रोती हुई अपनी माँ के पास गई।
उसकी माँ ने उसे गले लगाया और कहा, "बेटी, जो लोग तुम्हारा सम्मान नहीं करते, उनके लिए मत रोओ। उन चीज़ों में खुशी ढूँढो जो तुम्हारे पास हैं और जो तुम्हें प्यार करते हैं।"
तभी गाँव में एक शाही दूत आया और घोषणा की, "कल महल में एक बड़ा उत्सव है! रानी ने आदेश दिया है कि सभी बच्चे अपने सबसे सुंदर कपड़ों में महल आएँ!"
यह सुनकर गाँव की लड़कियाँ अपनी नई पोशाकों के बारे में बातें करने लगीं। वे माया को चिढ़ाने लगीं, "माया, तुम क्या पहनोगी?"
दुखी होकर माया अपने बगीचे में बैठ गई। तभी एक नन्हे खरगोश ने उससे पूछा, "माया, तुम उदास क्यों हो?" माया ने सारी बात बताई। खरगोश ने कहा, "घबराओ मत, मेरे पास कुछ चमकते हुए धागे हैं, इन्हें अपने कपड़ों पर लगा लो!"
तभी एक रंग-बिरंगी तितली उड़ती हुई आई और बोली, "ये सुंदर पंखुड़ियाँ लो, इनसे तुम्हारा पहनावा और भी प्यारा लगेगा।" पास के एक बड़े पेड़ ने भी अपनी टहनियाँ हिलाईं और कुछ सुनहरे फूल गिराए। "इन्हें अपने बालों में सजा लो," पेड़ ने कहा।
माया वे सब चीज़ें अपनी माँ के पास ले गई। माँ ने बड़ी सावधानी से माया के पुराने कपड़ों पर उन धागों, पंखुड़ियों और फूलों को इस तरह सजाया कि वह एक जादुई पोशाक बन गई।
महल के उत्सव में, सभी बच्चे कीमती कपड़ों में आए थे। लेकिन जैसे ही माया वहाँ पहुँची, सब देखते रह गए। प्रकृति के रंगों से सजी उसकी पोशाक सबसे अनोखी और सुंदर थी। रानी ने मुस्कुराते हुए कहा, "माया, तुम तो प्रकृति की राजकुमारी हो!" और उसे सम्मानित किया।
माया समझ गई कि असली सुंदरता महँगे कपड़ों में नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने में है।
Moral
सच्ची सुंदरता सादगी और प्रकृति के प्रेम में होती है।