नीलगिरी का जंगल बहुत ही शांत और सुंदर था। उस जंगल का राजा विक्रम नाम का एक शेर था। विक्रम केवल शक्तिशाली ही नहीं था, बल्कि वह बहुत न्यायप्रिय भी था। वह जंगल के हर छोटे-बड़े जानवर की रक्षा करता था।
उसी जंगल में पल्लवन नाम का एक बड़ा भालू रहता था। पल्लवन बहुत ताकतवर था, लेकिन उसमें बहुत घमंड था। वह सोचता था कि वह सबसे बड़ा है, इसलिए वह खरगोशों, हिरणों और बंदरों से बहुत बदतमीजी से बात करता था। उसके इस व्यवहार के कारण सभी जानवर उससे दूर रहते थे और उससे डरते थे।
एक दिन, खरगोश और हिरण राजा विक्रम के पास गए और अपनी समस्या बताई। "महाराज, पल्लवन भालू हमें हमेशा अपमानित करता है। यदि वह ऐसा ही करता रहा, तो हमें यह जंगल छोड़ना पड़ेगा।"
राजा विक्रम ने तुरंत पल्लवन को बुलाया। पल्लवन ने पहले तो बहाने बनाए, लेकिन विक्रम ने गंभीरता से कहा, "पल्लवन, ताकत दूसरों को डराने के लिए नहीं, बल्कि उनकी रक्षा करने के लिए होती है। यदि तुम दूसरों का सम्मान नहीं करोगे, तो इस जंगल में तुम्हारा कोई स्थान नहीं है।"
पल्लवन ने अपनी गलती मानी और वादा किया कि वह अब से सबके साथ विनम्रता से रहेगा।
विक्रम यह देखना चाहता था कि पल्लवन सच में बदला है या नहीं, इसलिए उसने एक बंदर को उसकी निगरानी के लिए भेजा। कुछ दिनों बाद, जब पल्लवन आराम कर रहा था, तभी वही खरगोश और हिरण शोर मचाते हुए आए और उसे डरा दिया। डर के मारे पल्लवन के हाथ से फलों की टोकरी गिर गई और सारे फल बिखर गए। खरगोश और हिरण हंसते हुए भाग गए।
तभी राजा विक्रम वहां आ पहुंचे। पल्लवन रोते हुए बोला, "महाराज, मैं आपकी बात मान रहा हूं, लेकिन ये जानवर मुझे जानबूझकर परेशान कर रहे हैं।"
विक्रम ने उन जानवरों की ओर देखा और कड़क आवाज़ में कहा, "पल्लवन अब सुधर रहा है। जब कोई व्यक्ति अच्छा बनने की कोशिश कर रहा हो, तो उसे परेशान करना बहुत गलत बात है। यदि तुम लोग सम्मान करना नहीं सीखोगे, तो तुम्हें यह जंगल छोड़ना होगा!"
खरगोश और हिरण ने अपनी गलती मान ली और माफी मांगी। पल्लवन राजा की न्यायप्रियता देखकर बहुत खुश हुआ और उसने विक्रम को अपना सच्चा मार्गदर्शक माना। उस दिन के बाद से पल्लवन जंगल का एक मददगार और दयालु जानवर बन गया।
Moral
दूसरों का सम्मान करना ही सच्ची शक्ति है।