एक घने जंगल के किनारे एक छोटी सी मैना रहती थी। उसकी आवाज़ बहुत मीठी थी, लेकिन उसके पंख साधारण भूरे रंग के थे। एक दिन, वह एक बड़े शाही बगीचे में गई। वहाँ उसने देखा कि मोर अपने शानदार, चमकते हुए पंख फैलाकर नाच रहे हैं।
"वाह! ये मोर कितने सुंदर हैं!" मैना ने ईर्ष्या से सोचा। "काश! मेरे पास भी ऐसे चमकीले पंख होते, तो सब मुझे ही देखते।"
बगीचे में घूमते समय, मैना को ज़मीन पर गिरे हुए कुछ मोर के पंख दिखाई दिए। अपनी सुंदरता बढ़ाने के लालच में, उसने एक-एक करके उन पंखों को अपने पंखों के बीच फँसा लिया। अब उसे लगा कि वह बहुत सुंदर दिख रही है। वह गर्व से अपनी नई सुंदरता दिखाने के लिए इधर-उधर टहलने लगी।
लेकिन उसकी यह खुशी ज़्यादा देर नहीं टिकी। एक झाड़ी के पीछे छिपी एक बिल्ली की नज़र उन चमकते पंखों पर पड़ी। बिल्ली धीरे-धीरे मैना की ओर बढ़ने लगी। खतरा भांपते ही मैना ने आसमान में उड़ने की कोशिश की। लेकिन उसने एक बड़ी गलती कर दी थी; बहुत सारे भारी पंख लगाने के कारण उसके पंख भारी हो गए थे और वह उड़ नहीं पा रही थी।
घबराहट में वह ज़मीन पर दौड़कर भागने की कोशिश करने लगी, लेकिन भारी पंखों की वजह से उसकी गति धीमी हो गई। इससे पहले कि वह किसी पेड़ पर पहुँच पाती, बिल्ली ने झपट्टा मारकर उसे पकड़ लिया। दूसरों की सुंदरता देखकर ईर्ष्या करने और अपनी असलियत भूल जाने के कारण मैना ने अपनी जान गँवा दी।
Moral
हमें जो मिला है उसी में खुश रहना चाहिए; दूसरों की नकल करना खतरनाक हो सकता है।