नीले समुद्र की गहराइयों में, एक समय था जब सभी समुद्री जीवों के पास मजबूत हड्डियाँ और कंकाल होते थे। उस विशाल साम्राज्य पर एक शक्तिशाली शार्क राजा का शासन था। उसकी एक प्यारी छोटी राजकुमारी थी। एक दिन, राजकुमारी बहुत बीमार हो गई और इतनी कमजोर हो गई कि वह तैर भी नहीं पा रही थी। राजा बहुत चिंतित था।
राजा ने घोषणा की, "जो कोई भी मेरी बेटी का इलाज करेगा, उसे मेरे दरबार में सर्वोच्च सम्मान दिया जाएगा!"
कई डॉक्टरों ने कोशिश की, लेकिन कोई भी उसे ठीक नहीं कर सका। अंत में, एक बुद्धिमान कछुआ डॉक्टर ने सुझाव दिया, "महाराज, केवल जमीन पर रहने वाले बंदरों के पास मिलने वाली एक विशेष पत्ती का रस ही राजकुमारी को ठीक कर सकता है।"
राजा को लगा कि कोई भी समुद्री जीव जमीन पर नहीं जा सकता। तभी, एक घमंडी जेलीफ़िश नेता, जो अपनी बुद्धिमानी की डींगें मारता था, को बुलाया गया। "मैं जमीन पर जा सकता हूँ!" जेलीफ़िश ने गर्व से कहा। राजा ने उसकी परीक्षा लेने के लिए आदेश दिया, "तो जाओ और वह पत्ती लेकर आओ!"
डर के मारे, जेलीफ़िश ने एक छोटी जेलीफ़िश को काम पर भेजा। छोटी जेलीफ़िश ने तट पर एक बंदर को फल खाते देखा और उससे कहा, "बंदर राज! समुद्र के राजा आपके जन्मदिन पर एक बड़ा भोज दे रहे हैं, आपको आना चाहिए!"
बंदर पहले तो हिचकिचाया, लेकिन जेलीफ़िश ने झूठ बोला कि वे उसे एक द्वीप तक ले जाएंगे। बंदर ने एक चाल चली और कहा, "मैं आऊँगा, लेकिन मेरा खास खाना पेड़ के एक खोखले हिस्से में है, उसे वहाँ से निकालना होगा।"
जब छोटी जेलीफ़िश उस पेड़ के पास पहुँची, तो बंदर ने एक भारी टहनी से उन पर हमला कर दिया। हड्डियों के बिना, जेलीफ़िश को बहुत चोट लगी और वे डरकर समुद्र में भाग गए।
जब राजा को जेलीफ़िश के झूठ और उनके घमंड का पता चला, तो उन्होंने उनके अहंकार को तोड़ने का निर्णय लिया। उस घटना के बाद से, जेलीफ़िश ने अपनी हड्डियाँ खो दीं। तब से वे बिना हड्डियों के, समुद्र में कोमल होकर तैरती हैं।