एक घने जंगल के बीचों-बीच एक बहुत ही सुंदर तालाब था। उस तालाब में रंग-बिरंगी मछलियाँ और नन्हे मेंढक बड़े मजे से रहते थे। लेकिन उस तालाब में एक बहुत बड़ा मगरमच्छ भी रहता था, जिसका नाम कालू था। कालू को अपनी ताकत पर बहुत घमंड था और वह अक्सर छोटे जीवों को डराता-धमकाता रहता था।
एक दोपहर, पिप नाम का एक छोटा मेंढक एक बड़े कमल के पत्ते पर आराम कर रहा था। तभी कालू मगरमच्छ पानी के अंदर से आया और उसने अपनी भारी पूंछ से पानी को ज़ोर से पटका। पानी की लहर इतनी तेज़ थी कि कमल का पत्ता और पिप हवा में उछलकर किनारे पर जा गिरे। पिप को काफी चोट आई।
"तुम ऐसा क्यों करते हो?" पिप ने गुस्से में पूछा। "बड़ा होने का मतलब यह नहीं कि तुम दूसरों को परेशान करो!" लेकिन कालू केवल हँसा और पिप को फिर से डराने के लिए तैयार हो गया। पिप समझ गया कि वह ताकत से कालू का मुकाबला नहीं कर सकता, पर उसने हार नहीं मानी।
पास के पेड़ पर बैठा कोर्वस नाम का एक कौआ यह सब देख रहा था। अगले दिन कोर्वस पिप के पास आया और बोला, "पिप, हम ताकत से उसे नहीं हरा सकते, लेकिन दिमाग से उसे सबक सिखा सकते हैं।"
कोर्वस ने एक योजना बनाई। वे कमल के पत्तों के छोटे टुकड़े पानी में तैराएंगे और उन पर तीखी मिर्च का पाउडर छिड़क देंगे। जब मगरमच्छ सांस लेने के लिए पानी के ऊपर आएगा, तो वह पाउडर उसकी आँखों में चला जाएगा।
अगले दिन, पिप ने छोटे पत्ते इकट्ठे किए और कोर्वस पास के गाँव से सूखी मिर्च का पाउडर ले आया। उन्होंने सावधानी से उन पत्तों पर मिर्च छिड़क दी और उन्हें पूरे तालाब में फैला दिया। जैसे ही कालू मगरमच्छ पानी से ऊपर आया, हवा के साथ मिर्च का पाउडर सीधे उसकी आँखों में चला गया।
"आह! मेरी आँखें! बहुत जलन हो रही है!" कालू दर्द से चिल्लाने लगा और पानी में छटपटाने लगा। पिप हिम्मत जुटाकर उसके सामने आया और बोला, "यह तुम्हारी बदतमीजी का नतीजा है। अगर तुमने फिर कभी हमें परेशान किया, तो हम और भी कड़ा सबक सिखाएंगे।"
कालू को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने वादा किया कि वह अब किसी को परेशान नहीं करेगा। उस दिन के बाद से, तालाब में सब शांति से रहने लगे।
Moral
बुद्धि बल से कहीं अधिक श्रेष्ठ होती है।