पहाड़ों के बीच बसे एक सुंदर राज्य में नीला नाम की एक राजकुमारी रहती थी। वह न केवल सुंदर थी, बल्कि बहुत दयालु भी थी। एक दिन उसकी माँ ने कहा, 'नीला, तुम्हारे चाचा के राज्य के राजकुमार से तुम्हारा विवाह तय हुआ है। तुम्हें कुछ समय वहाँ रहकर रहना होगा।'
नीला को नए स्थान पर जाने में थोड़ा डर लग रहा था। उसकी माँ ने उसे एक जादुई पत्थर दिया और कहा, 'जब भी तुम्हारा मन उदास हो, इसे छूना, यह तुम्हें साहस देगा।'
यात्रा के दौरान, नीला की साथी मीना, जो एक दासी थी, अचानक बदल गई। नीला के सुंदर कपड़ों को देखकर उसके मन में लालच आ गया। 'सुनो नीला, तुम राजकुमारी हो सकती हो, लेकिन मैं तुमसे अधिक चतुर हूँ। अब से तुम मेरी नौकरानी बनकर रहोगी। अपने कपड़े और गहने मुझे दे दो!' मीना चिल्लाई।
नीला घबरा गई, लेकिन उसने जादुई पत्थर को छुआ। पत्थर से एक धीमी आवाज़ आई, 'डरो मत नीला, सच्चाई की जीत होगी। अभी के लिए उसकी बात मान लो।' नीला ने अपनी राजसी पोशाकें मीना को दे दीं और एक साधारण लड़की का रूप धारण कर लिया।
महल पहुँचने पर, मीना ने राजा से झूठ बोला कि वही राजकुमारी है और नीला उसकी दासी है। लेकिन नीला के चेहरे की चमक और शांति देखकर राजा को कुछ अजीब लगा। मीना ने तुरंत कहा, 'इस दासी को बगीचे का काम दे दीजिए।'
नीला ने बिना किसी शिकायत के बगीचे का काम शुरू कर दिया। वह फूलों की देखभाल बहुत प्यार से करती थी। माली ने उसकी मेहनत देखकर पूछा, 'तुम इतनी अच्छी तरह काम कैसे करती हो? तुम कौन हो?' नीला ने धीरे से कहा, 'मैं एक साधारण लड़की हूँ।'
माली ने राजा को सब सच बता दिया। अगले दिन राजा भेष बदलकर बगीचे में आए। नीला की मेहनत और स्वभाव देखकर राजा बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने नीला से पूछा, 'सुंदर कन्या, तुम इतनी उदास क्यों हो?'
नीला ने रोते हुए अपनी पूरी कहानी सुना दी। राजा तुरंत महल पहुँचे और मीना की सच्चाई का पता लगाया। मीना ने फिर से झूठ बोलने की कोशिश की, लेकिन राजा उसकी चालाकी समझ गए। राजा ने नीला को उसकी सही पहचान दिलाई और धूमधाम से उसका विवाह राजकुमार से करवाया। मीना को उसके लालच के लिए दंड मिला।
Moral
सच्चाई और ईमानदारी ही असली सुंदरता है।