नीली पहाड़ियों की ऊंचाइयों पर, कविन नाम का एक लड़का अपने दादाजी के साथ रहता था। उनके गाँव में खेती के लिए उपजाऊ जमीन नहीं थी, इसलिए गाँव वाले भोजन के लिए शिकार पर निर्भर थे।
एक बार बाज़ार जाते समय कविन को एक बहुत ही सुंदर जंगली फूल दिखा। वह उसे अपने साथ घर ले जाना चाहता था। उसके दादाजी ने एक मिट्टी के बर्तन में उस पौधे को बड़े प्यार से लगा दिया।
कविन ने उस पौधे की बहुत देखभाल की। जल्द ही, उस पौधे पर बहुत सारे फूल खिल गए और ढेर सारी मधुमक्खियाँ वहाँ आने लगीं। दादाजी ने मधुमक्खियों के लिए एक छोटा लकड़ी का डिब्बा बनाया, जिसमें उन्होंने शहद इकट्ठा करना शुरू कर दिया। लेकिन मधुमक्खियों की संख्या इतनी बढ़ गई कि वे गाँव के अन्य बगीचों में भी जाने लगीं। कुछ बच्चे उनसे डर गए और गाँव वालों ने कविन और उसके दादाजी पर गुस्सा किया।
तभी गाँव में एक बीमारी फैल गई। लोग इतने कमज़ोर हो गए कि वे शिकार पर भी नहीं जा पा रहे थे। गाँव में खाने और दवा की कमी हो गई। तब कविन को एक विचार आया। उसने कहा, 'दादाजी, अगर हम इस शहद को जड़ी-बूटियों के साथ मिलाकर दें, तो यह लोगों को ताकत देगा!'
दादाजी ने शहद और जड़ी-बूटियों का मिश्रण तैयार किया और बीमारों को दिया। उस शहद के मिश्रण ने लोगों को बहुत शक्ति दी और वे जल्दी ठीक होने लगे। अपनी गलती का एहसास होने पर, गाँव वालों ने कविन और उसके दादाजी से माफी मांगी।
Moral
धैर्य और प्रेम से की गई छोटी सी कोशिश भी पूरे समाज के लिए वरदान बन सकती है।