एक सुंदर से गाँव में कथिर नाम का एक युवक रहता था। कथिर बुरा इंसान नहीं था, लेकिन उसकी एक बहुत बुरी आदत थी—बहुत अधिक आलस। वह खेतों में काम करने के बजाय, गाँव वालों द्वारा दिए गए भोजन पर निर्भर रहता और सारा दिन पेड़ों की छाँव में आराम करता था।
एक दिन, एक दयालु किसान ने कथिर को अनाज से भरी एक बड़ी बोरी उपहार में दी। कथिर ने सारा अनाज एक मिट्टी के बर्तन में भर दिया और उसे अपने पास रख दिया। दोपहर में जब वह लेटने लगा, तो उसके मन में बड़े-बड़े सपने आने लगे।
'जब मैं इस अनाज को बेचूँगा, तो मेरे पास बहुत सारे पैसे होंगे,' उसने मुस्कुराते हुए सोचा। 'उन पैसों से मैं एक गाय खरीदूँगा। वह गाय बहुत दूध देगी, और उस दूध को बेचकर मैं और भी गायें खरीदूँगा। जल्द ही, मैं इस पूरे गाँव का सबसे अमीर आदमी बन जाऊँगा!' वह कल्पनाओं की दुनिया में खो गया।
सपनों में इतना खो गया कि उसे पता ही नहीं चला कि उसका पैर हिल रहा है। अचानक, उसका पैर मिट्टी के बर्तन से टकरा गया। 'कड़क!' की आवाज़ के साथ बर्तन ज़मीन पर गिरकर चकनाचूर हो गया। सारा अनाज मिट्टी में मिल गया और बर्बाद हो गया।
कथिर घबराकर उठ खड़ा हुआ। उसके सारे सुनहरे सपने उस टूटे हुए बर्तन के साथ खत्म हो गए। उसे समझ आया कि जो इंसान मेहनत नहीं करता, वह अपने पास मौजूद छोटे से अवसर को भी खो देता है। केवल सपने देखने से पेट नहीं भरता, उसके लिए काम करना पड़ता है।
Moral
केवल सपने देखने से सफलता नहीं मिलती, मेहनत करना ज़रूरी है।