एक घने जंगल में ब्रूनो नाम का एक बड़ा भालू रहता था। ब्रूनो बहुत ही आलसी था। वह दिन भर बस खाता और सोता रहता था। वह भविष्य के लिए कभी कुछ जमा नहीं करता था। वहीं पास में चींटियों का एक छोटा सा समूह रहता था, जो ब्रूनो के खाने से गिरने वाले टुकड़ों पर अपना गुजारा करते थे।
चींटियों की नेता, पिप ने ब्रूनो की इस आदत को देखा और सोचा, 'यह भालू बहुत लापरवाह है। अगर कभी खाना मिलना बंद हो गया, तो यह क्या करेगा?' पिप ने ब्रूनो को सबक सिखाने का फैसला किया।
एक दोपहर, जब ब्रूनो पेड़ के नीचे गहरी नींद में सो रहा था, पिप अपनी पूरी सेना लेकर आया और ब्रूनो के चारों ओर घेरा बना लिया। पिप के इशारे पर, एक साहसी चींटी ने ब्रूनो के कान पर ज़ोर से काट लिया। 'आह!' ब्रूनो दर्द से चिल्लाते हुए उठ बैठा। उसने देखा कि हज़ारों चींटियाँ उसका रास्ता रोककर खड़ी हैं।
'कृपया मुझे जाने दो, मुझे बहुत भूख लगी है!' ब्रूनो ने गिड़गिड़ाते हुए कहा। पिप ने आगे बढ़कर कहा, 'ब्रूनो, हम तुम्हें तब तक नहीं जाने देंगे जब तक तुम अपनी गलती नहीं समझते। तुम केवल आज के बारे में सोचते हो, लेकिन जीवन में कल की तैयारी भी ज़रूरी है। हम तुम्हारे बचे हुए खाने पर पलते हैं, पर तुम अपने भविष्य के लिए कुछ नहीं बचाते।'
ब्रूनो को उस दिन पूरा दिन भूखा रहना पड़ा। शाम को पिप उसके पास आया और बोला, 'हमने तुम्हें चोट पहुँचाने के लिए ऐसा नहीं किया, बल्कि तुम्हें सही रास्ता दिखाने के लिए किया। हमें माफ कर दो।'
ब्रूनो को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने पिप से माफी मांगी और उसी दिन से उसने मेहनत करना और खाना जमा करना शुरू कर दिया। कुछ महीनों बाद जब भारी बारिश हुई और जंगल में घूमना मुश्किल हो गया, तब ब्रूनो को कोई परेशानी नहीं हुई। उसके पास जमा किया हुआ खाना था। उसने पिप और उसकी टीम को मन ही मन धन्यवाद दिया।
Moral
आज की मेहनत और बचत ही कल की सुरक्षा है।