एक बड़े से फार्म हाउस में चूहों का एक झुंड रहता था। वे बहुत शरारती थे और बहुत लालची भी। वे रात के समय किसान के अनाज और फलों को चुराकर खा जाते थे। किसान अपनी मेहनत की कमाई को बर्बाद होते देख बहुत दुखी था, इसलिए उसने एक उपाय सोचा।
किसान ने घर में एक बड़ी और फुर्तीली बिल्ली पाल ली। बिल्ली के आते ही चूहों की मौज-मस्ती खत्म हो गई। वे डर के मारे अपने बिलों में दुबक कर रहने लगे। अब वे बाहर निकलकर खाना खाने से भी डरते थे।
एक रात, सभी चूहों ने एक सभा बुलाई। एक बूढ़े चूहे ने सुझाव दिया, "दोस्तों, हमें डरकर नहीं रहना चाहिए। अगर हम बिल्ली के गले में एक छोटी सी घंटी बाँध दें, तो जब भी वह हमारे पास आएगी, घंटी की आवाज़ से हमें पता चल जाएगा। हम तुरंत छिप सकते हैं!"
यह सुनकर सभी चूहे खुशी से नाचने लगे। "वाह! क्या शानदार विचार है!" वे सब चिल्लाए। उन्हें लगा कि अब वे फिर से मजे से खा सकेंगे।
तभी एक छोटे से चूहे ने धीरे से पूछा, "विचार तो बहुत अच्छा है, लेकिन बिल्ली के गले में घंटी बाँधने की हिम्मत कौन करेगा?"
यह सुनते ही सभा में सन्नाटा छा गया। सभी चूहे एक-दूसरे का मुँह ताकने लगे, लेकिन किसी में भी बिल्ली के पास जाने की हिम्मत नहीं थी।
Moral
योजना बनाना आसान है, लेकिन उसे पूरा करना कठिन।