चंद्रपुर नाम के एक सुंदर राज्य में विक्रम नाम का एक राजा रहता था। वह अपनी प्रजा से बहुत प्रेम करता था। एक दिन, अपने लोगों की समस्याओं को करीब से समझने के लिए, वह बिना किसी सवारी के साधारण वेश में गाँवों की यात्रा पर निकला।
पथरीले और ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चलते-चलते, शाम होते-होते राजा के पैरों में तेज़ दर्द होने लगा। महल वापस आकर वह बहुत चिंतित था। उसने सोचा, "अगर मुझे इतनी दूर चलने से इतना दर्द हो रहा है, तो मेरे किसान और मजदूर जो रोज़ काम पर जाते हैं, उन्हें कितनी तकलीफ होती होगी!"
अगली सुबह, उसने अपने मंत्रियों की सभा बुलाई और घोषणा की, "हमारे राज्य की सड़कें बहुत खराब हैं। लोगों को दर्द से बचाने के लिए, हमें राज्य की सभी सड़कों को नरम मखमली कपड़ों से ढंक देना चाहिए!"
मंत्री यह सुनकर हैरान रह गए। उन्होंने कहा, "महाराज, सड़कों को कपड़ों से ढंकने में इतना पैसा खर्च होगा कि राजकोष खाली हो जाएगा। यह संभव नहीं है!"
तभी एक अनुभवी वृद्ध मंत्री आगे आए और बोले, "महाराज, पूरी दुनिया को बदलने की कोशिश करने के बजाय, क्यों न हम लोगों के चलने के तरीके को बदल दें? यदि हम हर नागरिक को मजबूत और आरामदायक चमड़े के जूते दे दें, तो उन्हें सड़कों की परवाह नहीं करनी पड़ेगी।"
राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने समझा कि बड़ी और महंगी योजना बनाने के बजाय, एक छोटा और सही समाधान ही सबसे बेहतर होता है। उसने तुरंत सभी लोगों को जूते देने का आदेश दिया।
Moral
पूरी दुनिया को बदलने की कोशिश करने के बजाय, व्यावहारिक समाधान ढूंढना अधिक बुद्धिमानी है।