एक सुंदर गाँव में रवि नाम का एक किसान अपने परिवार के साथ रहता था। उनके घर में एक छोटा सा नेवला भी रहता था। वह केवल एक जानवर नहीं, बल्कि परिवार का एक सदस्य बन गया था। वह उनके छोटे से बच्चे का बहुत ध्यान रखता था और उसकी रक्षा करता था।
एक दिन, रवि और उसकी पत्नी को बाज़ार जाना पड़ा। उन्होंने नेवले से कहा, "तुम बच्चे के पालने के पास ही रहना और उसका ध्यान रखना।"
नेवला बहुत ही वफादारी से पालने के पास बैठा था। तभी, झाड़ियों से एक काला साँप रेंगता हुआ आया और सीधे सोते हुए बच्चे की ओर बढ़ने लगा। खतरे को देखते ही नेवला बिजली की तरह झपटा और साँप को रोक लिया। बच्चे को बचाने के लिए नेवले और साँप के बीच भयंकर लड़ाई हुई। अंत में, नेवले ने साँप को मार गिराया, लेकिन इस लड़ाई में साँप का खून नेवले के मुँह और शरीर पर लग गया।
जब रवि और उसकी पत्नी बाज़ार से लौटे, तो उन्होंने घर में खून के धब्बे देखे। नेवले के मुँह पर खून देखकर उसकी पत्नी घबरा गई और गुस्से में चिल्लाई, "इस नेवले ने हमारे बच्चे को चोट पहुँचाई है!" गुस्से में आकर उसने पास पड़ी एक लकड़ी से नेवले को ज़ोर से मार दिया।
तभी रवि की नज़र पालने पर पड़ी। बच्चा शांति से सो रहा था। जब उसने पालने के नीचे मरे हुए साँप को देखा, तो उसके होश उड़ गए। उसे अहसास हुआ कि जिस नेवले ने उनके बच्चे की जान बचाई, उन्होंने उसी को बिना सोचे-समझे मार दिया। दोनों को अपनी गलती पर बहुत दुख हुआ।
Moral
बिना सच्चाई जाने गुस्से में लिया गया फैसला हमेशा पछतावा ही देता है।