एक घने और हरे-भरे जंगल में, एक साफ पानी की नदी बहती थी। उसी नदी के किनारे फ्लिप नाम का एक मेंढक रहता था। फ्लिप को अपनी शक्तिशाली टांगों पर बहुत घमंड था। उसे लगता था कि वह पूरे जंगल में सबसे ऊंचा कूद सकता है, और वह सारा दिन शोर मचाते हुए उछल-कूद करता रहता था ताकि सब उसे देखें।
एक दोपहर, ओटिस नाम का एक बूढ़ा उल्लू एक बड़े पेड़ की खोखल में शांति से सो रहा था। फ्लिप ने जब उल्लू को सोते देखा, तो उसे शरारत सूझी। वह पेड़ के पास गया और ज़ोर-ज़ोर से कूदते हुए चिल्लाया, 'ए ओटिस! इतनी सुंदर दोपहर में क्यों सो रहे हो? मुझे देखो, मैं कितना ऊँचा कूद सकता हूँ!' फ्लिप की कूदने की आवाज़ से ओटिस की नींद टूट गई।
ओटिस ने अपनी आँखें खोलीं और शांत भाव से फ्लिप को देखा। उसने फ्लिप को सबक सिखाने की सोची। ओटिस ने कहा, 'फ्लिप, तुम्हारी टांगें वाकई बहुत मज़बूत हैं। लेकिन अगर तुम सच में अपनी ताकत साबित करना चाहते हो, तो उस ऊँची चट्टान से कूदकर दिखाओ। जो वहाँ से सुरक्षित उतर जाएगा, वही असली खिलाड़ी होगा।'
अपनी तारीफ सुनकर फ्लिप का अहंकार और बढ़ गया। उसने बिना सोचे-समझे कहा, 'यह तो बहुत आसान है! मैं तो पहाड़ से भी कूद सकता हूँ!' वह दौड़कर उस ऊँची चट्टान पर पहुँच गया। ऊपर से नीचे देखने पर उसे थोड़ा डर लगा, लेकिन उसके घमंड ने डर को दबा दिया।
फ्लिप ने अपनी पूरी ताकत लगाई और चट्टान से नीचे कूद गया। लेकिन, जैसा उसने सोचा था, ज़मीन उतनी नरम नहीं थी। वह ज़ोर से ज़मीन पर गिरा, जिससे उसकी टांगों में तेज़ दर्द होने लगा। दर्द से कराहते हुए फ्लिप को समझ आया कि बिना वजह शोर मचाना और दूसरों को परेशान करना कितना गलत है। उसने सीखा कि असली ताकत दिखावे में नहीं होती।
Moral
घमंड इंसान को मुश्किल में डालता है; दूसरों की शांति का सम्मान करें।