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Moral Story

कविन और भारी पत्थर

Kavin and the Heavy Stone

एक सुनहरी सुबह थी। छोटा सा नवीन और उसके पिता सोहन अपने बगीचे में नए पौधे लगा रहे थे। नवीन बहुत ही मेहनती बच्चा था, लेकिन छोटा होने के कारण वह केवल छोटे-छोटे काम ही करता था।

4–10 yr 2 min medium
जब कोई काम अकेले करना मुश्किल लगे, तो मदद माँगने में कभी संकोच न करें।
कविन और भारी पत्थर — NilaTales cover art
4–10 yr 2 min medium

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एक सुनहरी सुबह थी। छोटा सा नवीन और उसके पिता सोहन अपने बगीचे में नए पौधे लगा रहे थे। नवीन बहुत ही मेहनती बच्चा था, लेकिन छोटा होने के कारण वह केवल छोटे-छोटे काम ही करता था।

काम करते समय, उन्हें एक गुलाब का पौधा लगाने के लिए एक बहुत अच्छी जगह मिली। लेकिन वहाँ एक बड़ी समस्या थी—एक बहुत बड़ा पत्थर ठीक उसी जगह पर पड़ा था। "पिताजी, इस पत्थर की वजह से हम यहाँ पौधा नहीं लगा सकते! इसे कैसे हटाएँ?" नवीन ने चिंता में पूछा।

सोहन ने मुस्कुराते हुए कहा, "नवीन, तुम खुद कोशिश करके देखो। अपनी पूरी शक्ति लगा दो।"

नवीन ने बड़े उत्साह से पत्थर को धक्का देना शुरू किया। उसने अपने नन्हे हाथों से बहुत ज़ोर लगाया, लेकिन पत्थर टस से मस नहीं हुआ। फिर उसने एक लकड़ी का डंडा लिया और उसे लीवर की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश की, पर पत्थर फिर भी नहीं हिला। नवीन थक गया और उदास होकर रोने लगा। "पिताजी, यह बहुत भारी है, मैं इसे नहीं हटा सकता!"

तभी सोहन उसके पास आए और उसके कंधे पर हाथ रखा। "नवीन, मैंने तुमसे कहा था कि अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करो। लेकिन तुम एक चीज़ भूल गए।"

"क्या पिताजी?" नवीन ने अपनी आँखें पोंछते हुए पूछा।

"तुम यह भूल गए कि मैं तुम्हारी मदद के लिए यहाँ हूँ!" सोहन ने प्यार से कहा। सोहन ने नवीन के छोटे हाथों को अपने मजबूत हाथों से पकड़ लिया और दोनों ने मिलकर ज़ोर लगाया। एक तेज़ आवाज़ के साथ, पत्थर अपनी जगह से खिसक गया।

नवीन खुशी से झूम उठा। "शुक्रिया पिताजी! आपके बिना मैं इसे कभी नहीं कर पाता!"

सोहन ने उसे गले लगाया और कहा, "बेटा, जब कोई काम अकेले करना मुश्किल लगे, तो मदद माँगने में कभी मत हिचकिचाना।"

Moral

जब कोई काम अकेले करना मुश्किल लगे, तो मदद माँगने में कभी संकोच न करें।

The Lesson

जब कोई काम अकेले करना मुश्किल लगे, तो मदद माँगने में कभी संकोच न करें।

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