तपती धूप में, कवि नाम का एक यात्री एक विशाल रेगिस्तान से गुजर रहा था। प्यास के कारण उसका गला सूख गया था और उसे चलने में बहुत कठिनाई हो रही थी। जब वह थककर गिरने ही वाला था, तभी उसे दूर एक पुराना कुआँ दिखाई दिया।
कुएँ के पास एक मिट्टी का घड़ा और एक लंबी नली रखी थी। पास ही एक लकड़ी के तख्ते पर लिखा था: 'इस नली में पानी डालकर दबाव डालें, तो कुएँ से नया पानी निकलेगा। पानी पीने के बाद, कृपया अगले यात्री के लिए घड़े को फिर से भर दें।'
कवि कुछ देर के लिए रुक गया। उसने सोचा, 'क्या मैं बस यहाँ मौजूद पानी पीकर चला जाऊँ, या नली का उपयोग करके नया पानी निकालूँ और घड़े को फिर से भर दूँ?' उसे एहसास हुआ कि अगर वह केवल अपने बारे में सोचेगा, तो अगला यात्री प्यासा रह जाएगा। उसने सोचा कि दूसरों की मदद करना ही सबसे बड़ा धर्म है।
उसने तुरंत नली का उपयोग किया और कुएँ से ठंडा, ताज़ा पानी निकाला। अपनी प्यास बुझाने के बाद, उसने बहुत सावधानी से मिट्टी के घड़े को फिर से पानी से भर दिया ताकि अगला यात्री भी आसानी से पानी पी सके। एक संतोषजनक मन के साथ, वह अपनी यात्रा पर आगे बढ़ गया।
Moral
दूसरों की भलाई के बारे में सोचना ही सच्ची मानवता है।