एक घने जंगल में कबूतरों का एक बड़ा झुंड रहता था। उस झुंड का नेतृत्व एक बूढ़ा और अनुभवी कबूतर करता था। वह बहुत समझदार था और हमेशा सावधानी बरतने की सलाह देता था। झुंड के सभी कबूतर उसकी बात मानते थे, इसलिए वे हमेशा सुरक्षित रहते थे।
एक सुबह, भोजन की तलाश में उड़ते हुए, झुंड एक अनजान इलाके में पहुँच गया। काफी देर तक उड़ने के कारण युवा कबूतर बहुत थक गए थे। तभी उन्हें एक चट्टान पर ढेर सारे अनाज के दाने बिखरे हुए दिखाई दिए।
'देखो! कितना सारा खाना है!' एक युवा कबूतर ने उत्साह से कहा।
'रुको!' बूढ़े कबूतर ने चेतावनी दी। 'ज़रा सोचो, यहाँ आस-पास न तो कोई पेड़ है और न ही कोई झाड़ी। ये दाने यहाँ अचानक कैसे आए? मुझे इसमें कोई खतरा महसूस हो रहा है। कृपया जल्दबाजी न करें।'
लेकिन भूख से बेहाल युवा कबूतरों ने उसकी बात अनसुनी कर दी और दाना चुगने के लिए नीचे उतर गए। जैसे ही उन्होंने दाना खाना शुरू किया, एक बड़ा जाल उन पर गिर गया और वे सब उसमें फंस गए!
'हाय! हमने क्या कर दिया! हमें बड़े की बात माननी चाहिए थी!' युवा कबूतर रोने लगे।
बूढ़े कबूतर ने धैर्य से कहा, 'घबराओ मत। अगर हम सब मिलकर एक साथ पूरी ताकत लगाकर पंख फड़फड़ाएं, तो हम इस जाल को भी साथ लेकर उड़ सकते हैं।'
सभी कबूतरों ने एक साथ ज़ोर लगाया और चमत्कारिक रूप से वे जाल सहित आसमान में उड़ने लगे। लेकिन जाल अभी भी उनके पैरों में फंसा हुआ था।
'अब हम क्या करेंगे?' उन्होंने घबराकर पूछा।
'हमें जंगल के एक समझदार चूहे के पास जाना चाहिए, वह हमारी मदद ज़रूर करेगा,' बूढ़े कबूतर ने सुझाव दिया। वे उड़ते हुए चूहे के पास पहुँचे। चूहे ने तुरंत अपने तेज़ दांतों से जाल को कुतर दिया और सभी कबूतरों को आज़ाद कर दिया।
सभी कबूतरों ने अपनी गलती मानी और बूढ़े कबूतर का धन्यवाद किया। बूढ़े कबूतर ने मुस्कुराते हुए कहा, 'बड़ों का अनुभव हमें मुसीबतों से बचाता है, और एकता हमें बड़ी से बड़ी समस्या से निकाल सकती है।'
Moral
बड़ों की सलाह मानना और एकजुट रहना ही सफलता की कुंजी है।